कमाना है तो बदलना होगा माइंडसेट
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाने का कौशल कोई रॉकेट साइंस नहीं। दिक्कत यह है कि अधिकांश ट्रेडरों का माइंडसेट गड़बड़ होता है। कुछ लोग फंडामेंटल आधारित निवेश को ट्रेडिंग से गड्डम-गड्ड कर देते हैं। दरअसल, उन्हें सारा ‘ज्ञान’ किनारे रखकर सामान्य व्यापार का सूत्र मन में बैठा लेना चाहिए कि थोक के भाव पर खरीदना और रिटेल के भाव पर बेचना है। इस तरह बराबर 5-10% का मार्जिन कमाते जाना है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
शुरू से दिख जाता है मुनाफे का ज़ोन
शेयरों के भावों के चार्ट पर डिमांड-सप्लाई के स्तरों के बीच के फासले को ‘प्रॉफिट ज़ोन’ कहते हैं। यह ज़ोन दिखाता है कि उस शेयर को डिमांड के स्तर पर खरीद और सप्लाई के स्तर पर बेचकर कितना फायदा कमाया जा सकता है। डिमांड-सप्लाई के स्तर टेक्निकल एनालिसिस के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल से भिन्न होते हैं। हालांकि डिमांड और सप्लाई के स्तर चिन्हित करने में आखिरी कैंडल का आकार निर्णायक होता है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी
डिमांड और सप्लाई में झूलते हैं भाव
शेयर बाज़ार में शेयरों का फ्लोटिंग स्टॉक सीमित है। इसलिए भाव डिमांड से सप्लाई और सप्लाई से डिमांड ज़ोन का चक्कर काटते हैं। भाव सीधी रेखा नहीं, बल्कि लहरों में चलते हैं। डिमांड ज़ोन से शुरू खरीद जब तक चलती है, तब तक भाव चढ़ते हैं। वहीं, खरीद के सारे ऑर्डर चुक जाने पर शेयर सप्लाई ज़ोन में पहुंच जाता है। वहां से बिक्री के सारे ऑर्डर चुकने तक शेयर गिरता रहता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
संस्थाओं की डगर दिखती है चार्ट पर
बाज़ार में डिमांड-सप्लाई का असंतुलन बैंक, प्रोफेशनल ट्रेडरों और वित्तीय संस्थाओं की खरीद-फरोख्त से बनता है। ये दिग्गज कब खरीद या बेच रहे हैं, इसे हम किसी शेयर के भावों के चार्ट पर देख सकते हैं। तब हम भी उसी स्तर पर खरीद या बेचकर उनकी तरह ट्रेडिंग से मुनाफा कमा सकते हैं। लेकिन वहां तक हम तभी पहुंच सकते हैं जब शेयर बाज़ार में भावों के उठने-गिरने का मूल नियम समझ लें। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी






