केवल 5% पूंजी ही ट्रेडिंग में लगानी चाहिए। रिटेल निवेशकों के लिए यह नियम बहुत खास है। शेयर बाज़ार के लिए अलग निकाले गए धन या अपनी सभी वर्तमान व भावी ज़रूरतों की गणना के बाद बचे इफरात धन का 95% हिस्सा उन्हें लंबे निवेश में लगाना चाहिए। इसका 50-60% भाग लार्जकैप, 30-40% मिडकैप और 20-30% स्मॉलकैप में लगाना चाहिए। नए साल में इस नियम का पालन करें तो वह शुभ ही होगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

इंसान के लालच और डर की कोई सीमा नहीं होती। यही दो भाव या विकार समूचे शेयर बाज़ार को चलाते हैं। यहां भी पचास-सौ नहीं, बल्कि लाखों लोगों के विकार एकसाथ काम करते हैं। इसलिए उनका सम्मिलित परिणाम क्या होगा, इसे कोई भी पहले से पक्का नहीं बता सकता। बड़ी से बड़ी गणना तक में गुंजाइश रहती है कि वह उलटी पड़ जाए। जो प्रायिकता समझते हैं, वही शेयर बाज़ार से कमाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जो लोग शेयर बाज़ार में आंख मूंदकर कूद पड़ते हैं, जिन्हें लगता है कि यहां नोट बनाना बहुत आसान है, वे अपने सपने ही नहीं, सारी पूंजी तक गंवा बैठते हैं। दो बात गांठ बांध लीजिए। पहली यह कि शेयर बाज़ार से थोड़े समय में नोट बनाना बेहद-बेहद कठिन है। दूसरे, यहां वही लोग ज्यादा कमाते हैं, जिनके पास जमकर इफरात पूंजी होती है। कम पूंजीवाले ज्यादा कमाकर भी पर्याप्त नहीं कमा पाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

साल 2018 अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच गया। आगे बढ़ने से पहले क्या खोया, क्या पाया इसका थोड़ा हिसाब लगा लेना चाहिए। लेकिन इसको लेकर ज्यादा मगजमारी नहीं करनी चाहिए क्योंकि पल-पल बदलती इस दुनिया में गुजरी बातें नहीं, हमारी सतर्कता ही काम आती है। बीते पलों से हम यह सर्तकता बढ़ाने का सबक ही सीख सकते हैं। बाकी जो पहले सफल हुआ, वह आगे भी सफल होगा, यह ज़रूरी नहीं है। अब परखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी