बाज़ार में जितनी अनिश्चितता, उतना ही ज्यादा जोखिम। इस समय भीतरी और बाहरी कारकों की वजह से हमारे शेयर बाज़ार में जैसी अनिश्चितता छाई हुई है, उसमें महज पांच-दस लाख रुपए की पूंजी लेकर बाज़ार में उतरे रिटेल ट्रेडरों के लिए दूर से तमाशा देखना ही उचित है क्योंकि ज़रा-सा दांव उल्टा पड़ते ही उनकी सारी की सारी ट्रेडिंग पूंजी उड़ सकती है। और, पूंजी ही न रही तो ट्रेडिंग क्या खाक करेंगे! अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

जब तक हम शेयरों के भाव के पीछे भागेंगे, तब तक बाज़ार को नहीं पकड़ सकते। वहीं, अगर हम कंपनी के कामकाज व संभावना के आकलन के आधार पर उसके शेयर का अंतर्निहित मूल्य निकालें और उससे भाव की तुलना करें तो बाज़ार को अपनी मुठ्ठी में कर सकते हैं। इसलिए बाज़ार कहां जाएगा, इसका कयास लगाने के बजाय हमें शेयरों के अंतर्निहित मूल्य के आधार पर लंबा निवेश करना चाहिए। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

आर्थिक कारकों का खराब होना समूचे बाज़ार के लिए एक जैसा नहीं होता। हर कंपनी पर उनका समान असर नहीं पड़ता। जैसे, डॉलर के मुकाबले रुपए का कमज़ोर होना आयातक कंपनियों पर भारी पड़ा है, जबकि इससे निर्यातक कंपनियों की आय बढ़ गई है। इधर रुपए की कमज़ोरी के दौर में आईटी कंपनियों के शेयरों का बढ़ जाना यही दिखाता है। इसलिए शेयर बाज़ार में ‘सब धान बाइस पसेरी तौलना’ सही नहीं है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हम कहीं न कहीं मानकर बैठे हैं कि शेयर बाज़ार बराबर सीधी रेखा में चलता है। इसलिए कहां तक जाएगा, इसका अनुमान ट्रेन्ड-लाइन खींचकर लगाया जा सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि शेयर बाज़ार सीधी रेखा में नहीं, बल्कि हमेशा लहरों में चलता है। बढ़ता या गिरता है तो लहरों की शक्ल में। अगर बाज़ार की यह लहरें बंद हो जाएं तो वहां ट्रेडिंग करने के सारे मौके एकबारगी खत्म हो जाएंगे। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी