सत्ता शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की हरकतों से समूचे देश का नुकसान होता है। नंवबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी सनक या साजिश में नोटबंदी लागू की तो देश के जीडीपी को 1.5% से 2% का नुकसान हो गया। हमारी अर्थव्यवस्था की जो विकास दर 8% के करीब जा पहुंची थी, वो नोटबंदी के बाद 6% तक सिमट गई। अब अमेरिका का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी अपनी सनक में भारत के आयात पर 50% टैरिफऔरऔर भी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के तमाम देशों पर जवाबी टैरिफ लगाने का जो अभियान इस साल 2 अप्रैल के ‘लिबरेशन दिवस’ से शुरू किया, उससे पहले ही मोदी सरकार ने अमेरिका के मनभावन फैसले लेने शुरू कर दिए थे। वो तब तक इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर 15% करने और डिजिटल विज्ञापनों पर लग रहा 6% गूगल टैक्स खत्म करने का ऐलान कर चुकी थी। ट्रम्प ने जवाबी टैरिफ की घोषणा कीऔरऔर भी

भारत के खिलाफ टैरिफ डोनाल्ड ट्रम्प ने लगाया है। लेकिन अग्निपरीक्षा 11 साल से देश की सरकार चला रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की हो रही है। सवाल उठ रहा है कि क्या सचमुच मोदी सरकार की कोई आर्थिक नीति है भी या सब कुछ हवाबाज़ी और जुमला है। नहीं तो ऐसा कैसे होता कि भारत की जो कृषि पूरी तरह राम-भरोसे है, उसकी सालाना चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) वित्त वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक पांचऔरऔर भी

भारत के खिलाफ 1971 के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि पाकिस्तान को केंद्र में रखकर चीन और अमेरिका एक धुरी पर आ गए हैं, जबकि भारत को रूस के साथ अपने रिश्तों को बचाना पड़ रहा है। यह तीन दशकों से चली आ रही भारत की उस विदेश नीति की घनघोर पराजय है जिसमें पाकिस्तान व चीन के गठजोड़ के खिलाफ अमेरिका को सायास साथ रखा गया था। लेकिन इस हकीकत को समझने केऔरऔर भी

अपनी अंतर्निहित शक्ति और संभावनाओं की बदौलत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती भारत की अर्थव्यवस्था मोदी सरकार की नीतियों के चलते इस समय दो पाटों के बीच फंसती नज़र आ रही है। सपना है कि दुनिया की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका भारत साल भर में चौथी और तीन साल में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। मगर दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने ही इस विकासयात्रा में फच्चर फंसा दिया है। सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी