अमीर का अमीर और गरीब का गरीब होते जाना समाज के लिए अच्छा नहीं। लेकिन अपने यहां शेयर बाज़ार तक में यही हो रहा है। 1 जनवरी 2018 से 8 फरवरी 2019 तक बीएसई सेंसेक्स 8.08% बढ़ा है, जबकि मिडकैप सूचकांक 18.52% और स्मॉलकैप सूचकांक 28.53% गिरा है। बड़ों को पुचकारना और छोटों को दुत्कारना अच्छा नहीं। हालांकि इससे छोटी मजबूत कंपनियों को पकड़ने का अच्छा मौका मिल गया है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

सरकार अगर वाकई कुछ करना चाहती तो वह केंद्र और राज्य सरकारों में इस समय खाली 24 लाख से ज्यादा पदों को फौरन भरने का इंतज़ाम कर देती। लेकिन उसने एनएसएसओ की वह रिपोर्ट ही दबा दी जिसमें खुलासा हुआ कि 2017-18 में देश में बेरोजगारी की दर 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। दिक्कत यह है कि मोदी सरकार को ठोस काम के बजाय नए-नए जुमलों पर ज्यादा यकीन है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

पीयूष गोयल कहते हैं कि बजट में संख्याओं से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है क्योंकि प्रधानमंत्री ईमानदार बजट चाहते थे। लेकिन जानकार बताते हैं कि इसमें इतनी बेईमानी बरती गई है कि यह बजट नहीं, फजट बन गया है। आईडीबीआई के लिए एलआईसी से वसूले गए 65,000 करोड़ को छोड़ दें, केवल एफसीआई की 1.40 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी को जोड़ दे तो राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4% हो जाता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

बजट में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पेंशन का सब्जबाग फेंका गया है। लेकिन यह पेंशन इस समय बूढ़े हो रहे मजदूरों को नहीं, बल्कि अभी 29 साल के उस मजदूर को 60 साल का होने पर मिलेगी, जो प्रतिमाह 100 रुपए अपने पेंशन खाते में डालेगा। 8% सालाना ब्याज पर मजदूर की यह बचत 30 साल में 1.50 लाख रुपए हो जाएगी। इस पर सरकार उसे 3000 रुपए प्रतिमाह पेंशन देगी। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

अगर बातों से चुनावी जंग और कस्मे-वादों से दिल जीता जा सकता तो इसमें मोदी सरकार का कोई तोड़ नहीं है। सरकारी नौकरियों और शिक्षा में सवर्ण गरीबों के लिए 10% आरक्षण घोषित कर दिया। लेकिन इसे लागू करने का कोई इंतज़ाम नहीं किया। बजट में 12 करोड़ छोटी जोतवाले किसानों को सालाना 6000 रुपए देने की घोषणा कर दी। लेकिन इन किसानों की पहचान कैसे की जाएगी, यह तक स्पष्ट नहीं है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी