लालच और भय की भावना शेयर बाज़ार की पल-पल की गति का मुख्य कारक है। अमूमन हर कारोबारी इनके आवेग/आवेश में बहता रहता है। रिटर्न से राग और रिस्क से द्वेष। हर किसी को लाभ की तमन्ना और घाटे से घबराहट होती है। लेकिन जीवन की तरह यहां भी वही बराबर सफल होता है जो राग या द्वेष में समभाव रहता है। वह लाभ या घाटे को एक जैसी तटस्थता से देखता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

कंपनियों के शेयरों के भाव उनके धंधे व मुनाफे के साथ दिशा पकड़ते हैं। लेकिन यह लंबे समय में होता है, जबकि छोटे समय यानी, कुछ दिन या महीनों में शेयरों के भाव उन्हें पकड़ने/छोड़ने की लालसा में लगे लाखों लोगों की लालच व डर की भावना से उछल-कूद मचाते हैं। एक ही वक्त कुछ लोग उनको हर हाल में खरीदने को लालायित रहते हैं, जबकि कुछ लोग बेचने पर उतारू रहते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार पर मुठ्ठीभर कंपनियों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। बाज़ार के कुल कारोबार में शीर्ष 50 कंपनियो का हिस्सा बढ़कर 58% हो चुका है। वहीं, शीर्ष की 100 कंपनियों की बात करें तो उनका हिस्सा 75% हो चुका है। साल भर पहले तक स्थिति इतनी विषम नहीं थी। आज अच्छी-खासी मजबूत छोटी कंपनियों तक का कोई पुछत्तर नहीं है। इसलिए बाज़ार बढ़ने के बावजूद उनके शेयर गिर रहे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी