चुनावी साल में पेश किए गए बजट का कोई मतलब नहीं होता। फिर भी एनडीए सरकार ने बजट में किसानों के खातों में 75,000 करोड़ रुपए डालने, असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए पेंशन स्कीम और नौकरीपेशा तबके के लिए इनकम टैक्स की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपए करने का ऐलान कर दिया। इन पर अमल मई में बननेवाली सरकार पर निर्भर है। लेकिन शेयर बाज़ार के नजरिए से यह अच्छा बजट है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

नकारात्मक खबर घबराहट पैदा कर दे तो शेयरों के भाव गोता लगा जाते हैं। कुछ महीने पहले यस बैंक के साथ यह हादसा हुआ था। हालांकि अब वह उससे उबरने लगा है। खबरों की ऐसी मार के वक्त अगर यकीन हो कि कंपनी की मूलभूत मजबूती बरकरार है और उसके धंधे का भविष्य संभावनामय है तो उसके डुबकी लगाते शेयर को लपकने का रिस्क लिया जा सकता है। आज तथास्तु में झटका खानेवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

अरुण जेटली इलाज कराने अमेरिका गए हैं तो उनकी जगह पीयूष गोयल आज बजट पेश कर रहे हैं। संविधान की व्यवस्था के मुताबिक, मई में लोकसभा चुनाव होने हैं तो यह मूलतः अंतरिम बजट है और इसे ‘वोट ऑन एकाउंट’ या लेखानुदान ही होना चाहिए ताकि नई सरकार बनने तक केंद्र में वर्तमान सरकार का कामकाज चलता रहे। लेकिन मोदी सरकार चुनावी चासनी फेंकने के लिए पूरा बजट पेश करने पर उतारू है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बजट में न तो उद्योग के लिए कुछ होगा और न ही उसमें टैक्स संबंधी कुछ प्रस्ताव लाए जा सकते हैं। कारण यह कि अब कस्टम ड्यूटी के अलावा सारे परोक्ष टैक्स जीएसटी में समाहित हो गए हैं जिसकी दरों का फैसला जीएसटी परिषद करती है। वहीं, प्रत्यक्ष टैक्स में कॉरपोरेट टैक्स पहले ही घटाकर 25% किया जा चुका है, जबकि व्यक्तिगत इनकम टैक्स पर सरकार कुछ करने की स्थिति में नहीं है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी