इस साल दुनिया के बाज़ारों से भारतीय बाज़ार के विपरीत दिशा में चलने की एक बड़ी वजह यह है कि हमारा बाज़ार पहले से ही काफी महंगा था तो निवेशक इसमें नई खरीद से बच रहे हैं। निफ्टी पहली जनवरी को 26.28 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा था। उसके बाद गिरा है। फिर भी 25 फरवरी को उसका पी/ई अऩुपात 26.53 रहा है क्योंकि कंपनियों के तिमाही नतीजे खराब रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

इस समय भारतीय शेयर बाज़ार का हाल बड़ा विचित्र चल रहा है। आम तौर पर वह दुनिया के बड़े शेयर बाज़ारों के साथ ताल मिलाकर चलता रहा है। लेकिन फिलहाल उसकी चाल सबसे न्यारी है। इस साल अभी तक अमेरिका का डाउ जोन्स सूचकांक 11%, जापान का निक्केई 9%, चीन का शांघाई सूचकांक 12% और लंदन का फुटसी सूचकांक 7% बढ़ा है, जबकि अपना सेंसेक्स 3% गिरा है। आखिर यह उलट चाल क्यों? अब सोम का व्योम…औरऔर भी

कुछ कंपनियां निवेशकों की दुश्मन होती हैं। ताम-झाम दिखाकर या ऑपरेटरों का जाल फैलाकर निवेशकों से धन झटकती हैं। फिर प्रवर्तक तो मौज करते हैं, जबकि कंपनियां सारा मूल्य चट कर जाती हैं। हमारे पुराने पाठक सीएनआई रिसर्च की सुझाई सूर्यचक्र पावर को लेकर ज़रूर ऐसे सदमे में होंगे। लेकिन कुछ कंपनियां अपने शेयरधारकों का मूल्य हमेशा बढ़ाती रहती हैं। उनका प्रबंधन कभी निवेशकों को गच्चा नहीं देता। आज तथास्तु में कुशल प्रबंधनवाली ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग से जो भी कमाता है, अपने दम पर कमाता है, किसी बाहरी सलाह/टिप्स के दम पर नहीं। कोई भी सफल ट्रेडर बहुत जगह डग्गेमारी करने के बाद अंततः खुद अपना सिस्टम विकसित करता है जो उसके स्वभाव व परिस्थिति से मेल खाता है। वह अपने माफिक पड़नेवाले शेयर भी पकड़ता है। धीरे-धीरे उसे अहसास हो जाता है कि उसके चुनिंदा शेयर खबरों या माहौल पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाने की पहली कडी है बाज़ार के स्वभाव को समझना। इसके बाद अलग-अलग शेयरों के स्वभाव को आत्मसात करें। इनमें से आप ट्रेडिंग के लिए पांच, दस या पंद्रह शेयर चुन सकते हैं। पच्चीस से ज्यादा शेयर हो गए तो आप भ्रमित हो सकते हैं। शेयरों के स्वभाव को दैनिक, साप्ताहिक, मासिक या सालाना चार्ट की मदद से समझा जा सकता है। इसमें टेक्निकल संकेतकों की मदद लीजिए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी