इंसान के लालच और डर की कोई सीमा नहीं होती। यही दो भाव या विकार समूचे शेयर बाज़ार को चलाते हैं। यहां भी पचास-सौ नहीं, बल्कि लाखों लोगों के विकार एकसाथ काम करते हैं। इसलिए उनका सम्मिलित परिणाम क्या होगा, इसे कोई भी पहले से पक्का नहीं बता सकता। बड़ी से बड़ी गणना तक में गुंजाइश रहती है कि वह उलटी पड़ जाए। जो प्रायिकता समझते हैं, वही शेयर बाज़ार से कमाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

जो लोग शेयर बाज़ार में आंख मूंदकर कूद पड़ते हैं, जिन्हें लगता है कि यहां नोट बनाना बहुत आसान है, वे अपने सपने ही नहीं, सारी पूंजी तक गंवा बैठते हैं। दो बात गांठ बांध लीजिए। पहली यह कि शेयर बाज़ार से थोड़े समय में नोट बनाना बेहद-बेहद कठिन है। दूसरे, यहां वही लोग ज्यादा कमाते हैं, जिनके पास जमकर इफरात पूंजी होती है। कम पूंजीवाले ज्यादा कमाकर भी पर्याप्त नहीं कमा पाते। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

साल 2018 अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच गया। आगे बढ़ने से पहले क्या खोया, क्या पाया इसका थोड़ा हिसाब लगा लेना चाहिए। लेकिन इसको लेकर ज्यादा मगजमारी नहीं करनी चाहिए क्योंकि पल-पल बदलती इस दुनिया में गुजरी बातें नहीं, हमारी सतर्कता ही काम आती है। बीते पलों से हम यह सर्तकता बढ़ाने का सबक ही सीख सकते हैं। बाकी जो पहले सफल हुआ, वह आगे भी सफल होगा, यह ज़रूरी नहीं है। अब परखें सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में बहुत शोर है। अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ते पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक देश से भागते रहे तो क्या होगा? लोकसभा चुनावों में मोदी का जादू नहीं चला तो! शेयर बाज़ार मंदी की गिरफ्त में आ गया तो! लेकिन इस सारे शोर और सवालों के बीच हमारे जीवन और भारतीय अर्थव्यवस्था पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ने जा रहा। इसी तरह कुछ ऐसी कंपनियां हैं जिन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी