लंबे निवेश के लिए कभी-कभी लंबा इंतज़ार करना पड़ता है क्योंकि कंपनी लाख अच्छी व संभावनामय हो, लेकिन उसमें सुरक्षित मार्जिन का ध्यान न रखा और महंगे भाव पर निवेश कर दिया तो अच्छा रिटर्न मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए हमें कंपनी के शेयर के गिरकर सुरक्षित दायरे में आने का इंतज़ार करना पड़ता है। यह इंतज़ार कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक का हो सकता है। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी

दुनिया के शेयर बाज़ारों की बनिस्बत अपने बाज़ार की उलट चाल की एक वजह यह भी है कि इधर अपने यहां स्थानीय कारक ज्यादा प्रभावी हो गए हैं। मई के लोकसभा चुनावों ने अभी से बाज़ार को अपने लपेटे में ले लिया है। बाज़ार को आभास हो चला है कि मोदी सरकार अपने भविष्य को लेकर काफी आशंकित है। इसलिए युद्ध का माहौल बनाकर उसको भी भुनाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

दिसंबर में जब से अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर बढ़ाकर 2.25 से 2.50% की है, तभी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारत से निकलने लगे हैं। अकेले जनवरी महीने में उन्होंने भारतीय शेयर बाज़ार से 4262 करोड़ रुपए निकाले हैं। फरवरी में अभी तक उन्होंने शुद्ध खरीद की है। फिर भी कुल मिलाकर इस साल उनका खाता ऋणात्मक चल रहा है। उन्होंने इस दौरान बांडों से भी धन निकाला है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले हफ्ते सिंगापुर में एशिया में निवेश के अवसरों पर एक सम्मेलन हुआ। हालांकि यह वर्चुअल या ऑनलाइन सम्मेलन ही था। लेकिन इसमें दुनिया के मशहूर फंड मैनेजर जिम रोजर्स से लेकर कई निवेश व ट्रेडिंग संबंधी रिसर्च फर्मों से भाग लिया। यह जानकर काफी अचंभा हुआ कि उन्होंने साल 2019 में एशिया में निवेश के मौकों का जिक्र करते हुए चीन ही नहीं, बांग्लादेश तक का नाम लिया। पर भारत का नहीं। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी