16वीं लोकसभा का अंतिम बजट सत्र गुरुवार, 31 जनवरी से शुरू हो रहा है। उस दिन आर्थिक समीक्षा पेश की जानी थी। अफसोस! इस बार ऐसी कोई समीक्षा पेश नहीं होगी। बजट सत्र 13 फरवरी तक चलेगा। लेकिन पूरा देश धीरे-धीरे चुनावमय होता जा रहा है तो बजट की परवाह सरकार के अलावा किसी को नहीं है। हालांकि बाज़ार के लिए यह पूरा हफ्ता बजटमय रहेगा और वह भविष्य के संकेत खोजना चाहेगा। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

धरती, जल, अग्नि व वायु को सदियों से हर जीवधारी के शरीर का आवश्यक अवयव माना गया है। इसी तरह किसी भी देश के लिए रणनीतिक महत्व के कुछ उद्योग होते हैं जो अनिवार्य रूप से हमेशा के लिए उससे जुड़े रहते हैं। इनकी उपयोगिता एफएमसीजी य दवा उद्योग से भी ज्यादा होती है। ऐसे उद्योग में सक्रिय प्रमुख कंपनियां लंबे निवेश के लिए बड़ी माफिक होती है। आज तथास्तु में ऐसे ही उद्योग की अहम कंपनी…औरऔर भी

जो ट्रेडर स्टॉक या इंडेक्स फ्यूचर्स में काम करते हैं, उनके लिए वीआईएक्स सूचकांक का कम रहना बड़े धीरज की मांग करता है क्योंकि ऐसे माहौल में उठने और गिरने के बीच का मार्जिन अमूमन थोड़ा होता है। ऐसे में कुशल ट्रेडर अनुशासन की डगर नहीं छोड़ता। वहीं, जो ट्रेडर अनुशासन का पालन नहीं करते, उन्हें बाज़ार की चंचलता डुबो डालती है। डर और अनिश्चितता के बीच भावनाओं में बह जाना आत्मघाती है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

साल 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान अमेरिका का S&P-500 सूचकांक 50% से ज्यादा गिर चुका था। उस समय वहां का वीआईएक्स सूचकांक सारे पुराने शिखरों को तोड़ते हुए 24 अक्टूबर 2008 को 89.53 पर पहुंच गया। फिर भी बाज़ार का गिरना नहीं रुका और वो 9 मार्च 2009 तक गिरता ही रहा। इसलिए यह गलत धारणा है कि वीआईएक्स सूचकांक के 40 तक पहुंच जाने के बाद बाज़ार उठने लगता है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

वीआईएक्स सूचकांक की अहमियत बहुत कम लोग समझते हैं। जो समझते भी हैं, वे गलत समझते हैं। मसलन, इसको लेकर गलत धारणा यह है कि इसके कम रहने पर बाज़ार में भारी बिकवाली आ सकती है। वहीं, इसका 40 से ज्यादा होना दिखाता है कि बाज़ार तलहटी पकड़ चुका है और अब ज्यादा नहीं गिर सकता। दुनिया में नब्बे के दशक से अब तक का अनुभव उक्त धारणा को गलत साबित करता है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी