मोदीराज में आर्थिक विकास दर का 39 सालों की औसत दर से कम रहना साबित करता है कि एकदलीय सरकारों की उपलब्धि गठबंधन सरकारों से खराब रही है। हम पाते हैं कि केंद्र में 1980 के बाद चार में से चार एकदलीय सरकारों का प्रदर्शन कमतर रहा, जबकि छह में से तीन गठबंधन सरकारों ने 6.3% सालाना के दीर्घकालिक औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है। इतिहास का यह सबक हमें याद रखना चाहिए। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

मोदी सरकार है तो गठबंधन सरकार। लेकिन चूंकि भाजपा ने 2014 के चुनावों में अपने दम पर पूरा बहुमत पाया और चुनाव-पूर्व गठबंधन का कोई सदस्य इसके मंत्रिमंडल में नहीं है, इसलिए हम इसे एकदलीय सरकार मान सकते हैं। इसके कार्यकाल में औसत आर्थिक विकास दर नई सीरीज के मुताबिक 7.4% रही है जो पहले के पैमाने पर 1.5% कम 5.9% निकलती है। यह 39 सालों की औसत दर 6.3% से कम है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

पिछले 39 सालों में केंद्र में शासन करनेवाली दस सरकारों में से सात गठबंधन की मिलीजुली सरकारें थीं। इनमें से छह सरकारों ने उन तीन सरकारों से ज्यादा आर्थिक विकास दर हासिल की जो किसी एक दल के बहुमत में चलाई जा रही थीं। केवल दिसंबर 1989 से जून 1991 तक, जब केंद्र में विश्वनाथ प्रताप सिंह और चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार थी, तभी हमारी आर्थिक विकास दर कम रही थी। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बंद है मुठ्ठी तो लाख की, खुल गई तो फिर खाक की। उंगली पर जब तक काली स्याही का निशान न लगे, तब तक सरकार में बैठी और उससे बाहर की पार्टियां उसकी कीमत लगा रही हैं। एक बार निशान लग गया, फिर पांच साल तक कौन पूछनेवाला! अभी गिनने को है कि 90 करोड़ मतदाता, जिसमें से 50 करोड़ युवा मतदाता और उसमें से भी 15 करोड़ ऐसे जिन्होंने पिछले पांच सालों में मतदाता बनने काऔरऔर भी

भारत में उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं। हमारे नगरों-महानगरों की छोटी-छोटी गलियों में आपको इसकी झलक मिल जाती है। न जाने कितने चरणों में अपना माल बनवाकर छोटी कंपनियां बडे ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। यही छोटी कंपनियां एक दिन बड़ी बन जाती हैं तो उनके मूल्य का कोई ठिकाना नहीं रहता। हम आज तथास्तु में ऐसी ही एक छोटी से बड़ी बनी कंपनी लेकर आए हैं जिसने आठ साल में आठ गुना से ज्यादा रिटर्न दिया है…औरऔर भी