अपनी सोच के उन सारे तत्वों की हमें चेक-लिस्ट बनानी होगी, जो ट्रेडिंग करते वक्त नकारात्मक भावनाओं को हवा देते हैं। इस चेक-लिस्ट के लिए कोई बना-बनाया फॉर्मूला नहीं है, बल्कि यह हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है। इसलिए इस पर हर ट्रेडर को खुद काम करना होता है। मन की गांठें खुद खोलनी पड़ती हैं। इन्हें खोलते ही कमाल होने लगता है और सब जानने की अहमन्यता टूटने लगती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार समेत वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग का अपना नियम-धर्म है। यह हमारी मान्यताओं व सोच से अलग है। ट्रेडिंग के दौरान हम अपनी सोच व मान्यताओं को एक तरफ रख दें और बाज़ार के वास्तविक पैटर्न व संतुलन को समझकर काम करें, तभी सफल हो सकते हैं। अन्यथा, बराबर विफल होने को अभिशप्त हैं। कम से कम हमें अपनी सोच के उन तत्वों को हटाना होगा जो नकारात्मक भावनाओं को उकसाते हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

मोदी सरकार के दोबारा सत्ता में आने के बाद शेयर बाज़ार में नई तेज़ी आ गई है। निफ्टी 12,000 और सेंसेक्स 40,000 के पार जा चुका है। यह तेज़ी जारी रह सकती है, बशर्ते कंपनियों का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) बढ़ने लगे। अभी तक पी/ई अनुपात का जलवा छाया रहा है। कंपनियों का मुनाफा नहीं बढ़ा तो बाज़ार कभी भी भरभराकर गिर सकता है। तथास्तु में आज अपने उद्योग में औरों से बेहतर काम कर रही कंपनी…औरऔर भी

कोई कहे कि शेयर-ट्रेडिंग के दौरान बेहतर होगा कि सोचना बंद कर दें तो आप कहेंगे कि क्या बकवास है! सोचना तो ट्रेडिंग की समूची प्रक्रिया में चलता ही रहता है, उसे कैसे रोक सकते हैं! सही बात कि आप क्या और कैसे सोचते हैं, इससे आपकी ट्रेडिंग शुरू से अंत तक प्रभावित होती है। फिर भी इस सोचने पर बराबर नज़र रखनी चाहिए और उसे जितना संभव हो, उतना घटा देना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी