स्वतंत्र बाज़ार में सौदा संपन्न होने के लिए ज़रूरी है कि खरीदने और बेचनेवाले एकसाथ मौजूद हों। शेयर बाजार में हर पल यही होता है। कुछ लोग अपने शेयर बेचने पर उतारू रहते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें खरीदने को तत्पर रहते हैं। एक को लगता है कि इस वक्त बेचने में फायदा है क्योंकि शेयर यहां से ज्यादा नहीं बढ़नेवाला, जबकि दूसरे को लगता है कि शेयर यहां से जमकर बढ़नेवाला है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

जो हमारे मन में होता है, उसे ही हम अक्सर तथ्यों/आंकड़ों से पुष्ट करने में लगे रहते हैं बगैर यह परखे कि तथ्य/आंकड़े सचमुच क्या कह रहे हैं। मनोविज्ञान में इस प्रवृत्ति को कन्फर्मेशन बायस या पुष्टि पूर्वाग्रह कहते हैं। इस पूर्वाग्रह के चलते हम अपनी धारणा के खिलाफ जानेवाले हर तथ्य/आंकड़े को नकारते रहते हैं। यह प्रवृत्ति यकीनन गलत है। लेकिन इसके बिना शेयर बाज़ार में कोई काम ही नही हो सकता। अब सोम का व्योम…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2018-19 में पांच सालों में सबसे कम रही है। कृषि की विकास दर मात्र 2.9% है, जबकि पिछले साल 5.9% रही थी। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र सुस्ती का शिकार है। शेयर बाज़ार में लिस्टेड 1619 कंपनियों का समग्र शुद्ध लाभ मार्च 2019 की तिमाही में साल भर पहले से कम रहा है। लेकिन शायद दबने के बाद अब उठने का दौर शुरू हो रहा है। तथास्तु में आज उठने को तैयार एक कंपनी…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में लंबे निवेश का फैसला बहुच सोच-समझकर किया जाता है। लेकिन ट्रेडिंग में अक्सर हम आवेग में फैसला करते हैं। मन में बैठा है कि मुझे कभी घाटा नहीं खाना तो स्टॉप-लॉस के करीब आते ही हम भ्रम, डर व चिंता जैसी भावनाओं के शिकार हो जाते हैं। वहीं, मन में बैठा लिया कि स्टॉप-लॉस तो ट्रेडिंग के बिजनेस की लागत है तो ऐसी नकारात्मकता या तनाव की नौबत नहीं आएगी। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

नकारात्मक व नुकसानदेह भावनाओं को हवा देने वाली सोच की चेक-लिस्ट बड़े काम की होती है। हम जैसे-जैसे उस लिस्ट में दर्ज आदतों को काटते जाते हैं, हमारे अंदर डोपामाइन नाम के एक हार्मोन व न्यूरोट्रांसमिटर का स्राव शुरू हो जाता है। इससे आत्मसम्मान व आत्मविश्वास बढ़ता जाता है। साथ ही हम ऐसी नई आदतें सीखने लगते हैं जो ट्रेडिंग में हमारी सोच को वस्तुपरक बनाती हैं और हम लाभ कमाने लगते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी