बढ़ना ही है, अंदर नहीं तो बाहर से!
कंपनियां छोटी से बड़ी बनती हैं। कुछ राज्यों तक सीमित ब्रांड बढ़ते-बढ़ते बड़े ब्रांडों तक का अधिग्रहण कर लेते हैं और कंपनी अचानक क्षेत्रीय से राष्ट्रीय बन जाती है। उद्योग में एक तरीका अंदर से धीरे-धीरे बढ़ने का है जिसे ऑर्गेनिक या कार्बनिक विकास कहते हैं। दूसरा तरीका इन-ऑर्गेनिक विकास या अधिग्रहण का है। आज हम तथास्तु में ऐसी कंपनी पेश कर रहे हैं जो अधिग्रहण के जरिए बढ़ी है और उसकी भावी रणनीति भी यही है।औरऔर भी
सही-गलत बाद में, पहले सच तो जान
पुष्टि पूर्वाग्रह की सहज मानवीय प्रवृति से उपजे तेजड़ियों और मंदड़ियों का एकसाथ शेयर बाज़ार में होना ही उसकी धड़कन है, सांस है। इसी प्रवृत्ति पर समूचे बाज़ार की कार्यप्रणाली टिकी हुई है। जिस किसी को भी शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना है, उसे खुद के सही या गलत होने की पड़ताल में पड़ने के बजाय बाज़ार में हरेक पल काम कर रहे इस सहज मनोविज्ञान को अच्छी तरह सोख लेना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
चाह मुनाफे की, पड़े एक-दूसरे के पीछे
जो पहले शेयर खरीद चुके होते हैं, वे चाहते हैं कि बाज़ार बराबर बढ़ता रहे। वे स्वभावतः तेजड़ियों के खेमे में चले जाते हैं। वहीं, जिन्होंने पुट-ऑप्शन खरीद रखे होते हैं, जो शॉर्ट-सेलर हैं यानी शेयर पहले बेच चुके होते हैं, वे मंदड़ियों का खेमा मजबूत करते हैं। वे चाहते हैं कि बाज़ार गिरता जाए ताकि पुट-ऑप्शन महंगा हो और सस्ते में शेयर खरीदकर पहले किया गया बेचने का सौदा पूरा कर सकें। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
बढ़ने की उम्मीद व गिरने का विश्वास
शेयर बाज़ार में जिन्हें लगता है कि बाज़ार यहां से बढ़ने ही बढ़नेवाला है, जो तथ्यों/आंकड़ों की परवाह किए बगैर खरीदने में लगे रहते हैं, उन्हें बुल या तेजड़िया कहा जाता है। वहीं, जिन्हें लगता है कि बाज़ार आगे कतई नहीं बढ़ेगा और जो तथ्यों/आंकड़ों की परवाह किए बिना बेचने में लगे रहते हैं, उन्हें बियर या मंदड़िया कहा जाता है। तेजड़िए और मंदड़िए, दोनों पुष्टि पूर्वाग्रह की बेतुकी प्रवृत्ति के शिकार हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी







