शेयर बाज़ार में उतरे ट्रेडर व निवेशक के रूप में हमें भावनाओं पर आधारित खरीद-बिक्री से बचना चाहिए और वही करना चाहिए जो भावों के चार्ट पर डिमांड और सप्लाई का समीकरण, उनका संतुलन कह रहा हो। ऐसा करने पर भी बाज़ार का रिस्क खत्म नहीं होता। लेकिन वह न्यूनतम ज़रूर हो जाता है। अभी के दौर में शेयर सूचकांक जितना चढ़ चुके हैं, उसे देखते हुए बहुत सावधान रहने की ज़रूरत है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार गिरते-गिरते आखिर कहां तक गिर सकता है? वहां तक, जहां समझदार खरीदनेवालों को बाज़ार में फिर से मूल्य नहीं दिखता। जहां उन्हें लगेगा कि इस स्तर पर शेयरों को खरीदना मुनाफे का सौदा बन सकता है। भाव जब वहां तक गिर जाते हैं जहां कोई भी बेचने को तैयार नहीं होता तो वहां पर स्टॉक या बाज़ार की सप्लाई खत्म हो जाती है और डिमांड का नया चक्र शुरू हो जाता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में बहुत ज्यादा तेज़ी अच्छी नहीं होती। खासकर तब, जब अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी न हो और ज्यादातर कंपनियों के नतीजे भी दबे-दबे आ रहे हों। अभी क्या हालत है? कुछ महीनों में लोगों ने चुनिंदा शेयरों को जमकर खरीदा तो सेंसेक्स व निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए। उन्हें अब मुनाफा कमाना है। लेकिन चढ़े भाव पर उन्हें ग्राहक मिल नहीं रहे तो बाज़ार का रुक-रुककर गिरते जाना लाज़िमी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में शेयरों के भाव उठने-गिरने का एक बड़ा कारक यह है कि उसमें खरीदने के अधूरे ऑर्डर कितने और बेचने के अधूरे ऑर्डर कितने हैं। भाव के किसी स्तर पर अगर बेचने के अधूरे ऑर्डर खरीदने के अधूरे ऑर्डरों से काफी ज्यादा/कम होते हैं तो शेयर बढ़ने/गिरने का रुख छोड़कर गिरना/बढ़ना शुरू कर देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शेयरों के खरीद व बिक्री के ऑर्डरों को आपस में मैच करना होता है। अब मंगलवार की बुद्धि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार में कोई भी अपना घाटा और दूसरों का फायदा कराने नहीं आया। यहां खरीदनेवाला इसी उम्मीद में खरीदता है कि वह शेयर दमदार है और उसे वह भविष्य में ज्यादा भाव पर बेचकर मुनाफा कमा लेगा। इस खरीददार को सौदा पूरा करने के लिए बेचनेवाला चाहिए होता है। वहीं, दूसरी तरफ बेचनेवाले को लगता है कि उस शेयर में अब ज्यादा दम नहीं बचा तो वह बेचकर निकल जाना चाहता है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी