ऑपेरेशन सिंदूर में आकाश और ब्रह्मोस मिसाइलों का जो श्रेय मोदी सरकार के मेक-इन इंडिया अभियान को दिया जा रहा है, उनका सफल परीक्षण 1990 के दशक में ही हो चुका था। हमारे डिफेंस क्षेत्र में बहुत सारी कंपनियां पहले से काम कर रही हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, भारत डायनेमिक्स, मझगांव शिपबिल्डर्स व कोचीन शिपयार्ड जैसी सरकारी कंपनियों से लेकर निजी क्षेत्र की भारत फोर्ज, आइडियाफोर्ज, एस्ट्रा माइक्रोवेव और डेटा पैटर्न तक। ऊपर से हमारी 41औरऔर भी

ऐसा नहीं कि सरकार सैन्य बलों पर कम खर्च करती है। खुद उसने गिनाया है कि देश का डिफेंस बजट 2013-14 में ₹2,53,345.89 करोड़ हुआ करता था। इसे उसने 2024-25 में ₹6,21,940.85 करोड़ पर पहुंचा दिया। हिसाब लगाएं तो 2013-14 में देश का कुल बजट ₹14,30,825 करोड़ का था। मनमोहन सरकार ने इसका 17.71% हिस्सा डिफेंस पर खर्च किया था। वहीं 2024-25 में कुल बजट ₹48,20,512 करोड़ का था, जिसका 12.90% मोदी सरकार ने डिफेंस पर खर्चऔरऔर भी

सरकार का दावा है कि भारत ने 2024-25 में ₹23,622 करोड़ या 276 करोड़ डॉलर का डिफेंस निर्यात किया। लेकिन स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) के अनुसार 2022 में भारत विश्व में डिफेंस निर्यात की रैंकिंग में 40वें स्थान पर था और तब उसका डिफेंस निर्यात मात्र 1.1 करोड़ डॉलर का था। उस साल 201.7 करोड़ डॉलर निर्यात के साथ चीन दुनिया में चौथे और रूस 282 करोड़ डॉलर के साथ तीसरे नंबर पर था। तबऔरऔर भी

दुनिया में साल 2020 से 2024 के दौरान सबसे ज्यादा हथियार निर्यात करनेवाले 15 देशों की सूची में भारत का कहीं कोई नाम नहीं है। फिर भी हमारी सरकार के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हथियार निर्यात में भारत के झंडे गाड़ देने की बात कर रहे हैं। यह निपट संघियों की वही सोच है जो सरस्वती शिशु मंदिर के अध्यापक को प्रोफेसर और अदने-से रेलवे अफसर को भी जीआरएम बताने से नहीं चूकते। दुनिया के हथियार निर्यातऔरऔर भी