रिजर्व बैंक का खजाना देश के लिए इतना पवित्र माना जाता रहा है कि वो भले ही लाखों करोड़ का मुनाफा कमा ले, उस पर एक धेले का भी टैक्स नहीं लगाया जाता। चूंकि रिजर्व बैंक भारत का केंद्रीय बैंक है। इसलिए इसे ध्यान में रखते हुए आरबीआई एक्ट, 1934 के सेक्शन-48 के तहत उसे इनकम टैक्स या किसी तरह के दूसरे टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा गया ताकि उसका वित्तीय स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सकेऔरऔर भी

भारतीय रिजर्व बैंक पहले भी कमाता था और अब भी कमाता है। वो अपना सारा खर्च खुद उठाता है। लेकिन उसके खजाने पर आज तक मोदी सरकार जैसा हाथ साफ किसी ने नहीं किया था। वो रुपए को संभालने के लिए बाज़ार में डॉलर बेचता है, उस पर भी कमाता है। मसलन, 2024-25 में उसने 399 अरब डॉलर बेचे, जबकि 2023-24 में 153 अरब डॉलर ही बेचे थे। उसकी कुल आस्तियों में विदेशी मुद्रा 64.4% और भारतऔरऔर भी

वित्त सचिव से रिजर्व बैंक के गवर्नर बने शक्तिकांत दास ने छह साल तक मोदी सरकार के दास की तरह काम किया। 12 दिसंबर 2018 को उनके गवर्नर बनने के बाद से 31 मार्च 2024 तक सरकार ने रिजर्व बैंक के खजाने से ₹6.61 लाख करोड़ साफ कर दिए। 10 दिसंबर 2018 को दास का कार्यकाल खत्म होने के अगले दिन से रिजर्व बैंक का गवर्नर संजय मल्होत्रा को बना दिया गया। मल्होत्रा भी केंद्र सरकार मेंऔरऔर भी

देश संस्थाओं से बनता है। संस्थाएं धीरे-धीरे सदियो में बनती हैं और उनके बनने-बनाने में पीढ़ियां खप जाया करती हैं। जो संस्थाओं को सुनियोजित ढंग से तोड़ या कमज़ोर कर रहा हो, वो देश को मजबूत नहीं, खोखला करता है। भारतीय रिजर्व बैंक 1 अप्रैल 1935 को बनी वो संस्था है जो देश के संपूर्ण मौद्रिक व बैंकिंग तंत्र की संचालक ही नही, नियामक भी है। मोदी सरकार ने 11 साल के शासन में इस सस्था कोऔरऔर भी

अगर आप शेयर बाज़ार का फायदा उठाने के बारे में गंभीर हैं तो बिजनेस अखबारों की हेडलाइंस, टीवी चैनलों की सिफारिशों और ऑनलाइन या वॉट्स-अप ग्रुप में दी जा रही टिप्स से ऊपर उठना होगा। जिस भी कंपनी के शेयर खरीदने हैं, उसके बिजनेस मॉडल और प्रबंधन की कुशलता के साथ ही यह भी समझना होगा कि वो हासिल लाभ को लगाती कहां है। कंपनी का बिजनेस ऐसा होना चाहिए जो लगाई गई पूंजी पर ज्यादा रिटर्नऔरऔर भी