जबरदस्त चुनावी सरगरमियां। चुनाव का साल। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पिछले बीस सालों में बीएसई सेंसेक्स में 50% से ज्यादा बढ़त उन सालों में हुई है जिनमें लोकसभा के चुनाव हुए थे। दिसंबर 1998 से अप्रैल 2019 तक सेंसेक्स 36,000 अंक बढ़ा है। इसमें से करीब 20,000 अंकों की वृद्धि साल 1999, 2004, 2009 और 2019 में अप्रैल अंत तक हुई है। ये सभी चुनावों के साल रहे हैं। क्या होगा आगे? अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

चार चरणों का मतदान हो चुका। तीन चरणों का बाकी। अंतिम सातवां चरण 19 मई को संपन्न होगा। सुप्रीम कोर्ट ने 21 विपक्षी दलों की याचिका पर आधे ईवीएम में पड़े वोटों को वीवीपैट की पर्चियों से मिलाने का फैसला न सुनाया तो 23 मई को स्पष्ट हो जाएगा कि अगले पांच सालों के लिए केंद्र में किसकी सरकार बनेगी। जाहिर है कि शेयर बाज़ार दिल थामकर नतीजों का इंतज़ार कर रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार लंबे समय में झांकियों पर नहीं, ठोस तथ्यों पर चलता है। लगने और होने भी फर्क है। हमें लगता है कि मोदीराज में शेयर बाज़ार जमकर बढ़ा है। लेकिन हकीकत यह है कि मई 2014 से अप्रैल 2019 तक बीएसई सेंसेक्स की सालाना चक्रवृद्धि दर 10.1% रही है, जबकि जून 2004 से मई 2009 तक यह दर 27.1% और जून 2009 से मई 2009 के बीच 12.3% रही थी। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर के लिए शेयर बाज़ार से नियमित मुनाफा कमाना शेर के जबड़े से शिकार छीन लेने जैसा काम है। अंतर बस इतना है कि इसमें दुस्साहस नहीं, बल्कि शांति व समझदारी से काम करना पड़ता है। हालांकि बाज़ार में सक्रिय ज्यादातर लोग करोड़पति से कम नहीं होते। लेकिन बाज़ार को उन आम लोगों के बीच समृद्धि के वितरण का माध्यम माना जा सकता है जो उसकी कला व विज्ञान को समझते हैं। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी