बहुत छोटी कंपनियां शेयर बाज़ार में अक्सर बहुत बड़ा कमाल कर देती हैं। हमने करीब पांच साल पहले 10 अगस्त 2014 इसी कॉलम में केवल बीएसई में लिस्टेड कंपनी मॉरगैनाइट क्रुसिबल को चुना था। पिछले चार सालों में कंपनी का शुद्ध लाभ ढाई गुना बढ़ा है, जबकि इसी दौरान उसका शेयर छह गुना (385 से 2330) तक उठने के बाद अब भी साढ़े तीन गुना (1365) ऊपर है। आज भी तथास्तु में पेश है एक माइक्रोकैप कंपनी…औरऔर भी

अर्थव्यवस्था से लेकर शेयर बाज़ार तक के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण दिन। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में 11 बजे बजट भाषण पेश करेंगी। जीएसटी लागू होने के बाद कर-प्रस्तावों का बहुत महत्व नहीं रह गया है। इसलिए सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि वे अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए क्या कदम उठाने जा रही हैं। बाज़ार यह देखेगा कि वे एनबीएफसी के तरलता संकट को कैसे दूर करती हैं। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

हमें बहुत फर्क नहीं पड़ता कि सरकार टैक्स का धन खर्च करे या उधारी का। लेकिन आईएमएफ, विश्व बैंक, रेटिंग एजेंसियों, अर्थशास्त्रियों व विदेशी निवेशकों को इस बात से बहुत फर्क पड़ता है कि सरकार अपना खर्च पूरा करने के लिए कितना उधार ले रही है। यह स्थिति बजट में राजकोषीय घाटे से सामने आती है। इस बार अप्रैल-मई में ही अंतरिम बजट में तय राजकोषीय घाटे का 52% खर्च हो चुका है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वजह चाहे जो हो, दहाई अंक के विकास का सपना 2018-19 की आखिरी तिमाही तक आते-आते जीडीपी के 5.8% बढ़ने तक सिमट गया। यह पांच साल की न्यूनतम विकास दर है। सरकार ने चुनावों के बाद आखिरकार मान लिया कि बेरोजगारी 45 सालों के उच्चतम स्तर तक पहुंच चुकी है। पांच सालों से देश का निर्यात जहां का तहां अटका रहा, वहीं घरेलू बचत दर 24% से घटकर 17% पर आ चुकी है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी