बाज़ार के लिए बजट बना बीती बात
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बजट कितना कारगर होगा, यह कम से कम एक साल बाद पता चलेगा। लेकिन शेयर बाज़ार के लिए तो वह हफ्ते भर में ही इतिहास बन चुका है। ट्रेडर और निवेशक अब बजट के प्रस्तावों से बाहर निकलकर अन्य मसलों पर गौर करने लगे हैं। जैसे, कंपनियों के तिमाही नतीजे, दुनिया में चल रहे व्यापार युद्ध, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और अलग-अलग उद्योगों की स्थिति क्या चल रही है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
ढकोसला पूरा, मगर सारतत्व नदारद
साल 2022 में जब देश आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहा होगा, तब तक किसानों की आय ही नहीं, कृषि निर्यात तक दोगुना कर दिया जाएगा। लेकिन कैसे? सीतारमण भजते रहो! वे चाहतीं तो देश में 560 लाख करोड़ रुपए की संपदा रखने वाले अरबपतियों पर 1% वेल्थ टैक्स लगाकर 5.6 लाख करोड़ और उत्तराधिकार टैक्स से 9.3 लाख करोड़ जुटा सकती थीं। लेकिन उन्होंने अमीरों पर सरचार्ज से जुटाए केवल 2724 करोड़! अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
हैं स्वदेशी, पर निवेश लाना है विदेशी!
बजट में भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का सारा भार देशी नहीं, विदेशी पूंजी पर डाल दिया गया है। शेयर बाज़ार में पूंजी लगानेवाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए केवाईसी नियम आसान कर दिए गए हैं। मेक-इन इंडिया भले ही पिछले पांच सालों में सफल न हुआ था, लेकिन विदेशी पूंजी को मैन्यूफैक्चरिंग में खींचने का दावा है। ऊपर से भारत सरकार खुद पहली बार संप्रभु बांड से विदेशी ऋण जुटाने जा रही है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
पेशेवर झूठ से पेशेवर निराशावादी भले
सब्ज़बाग को सब्ज़बाग कहना निराशावाद नहीं होता। पर प्रधानमंत्री मोदी 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था को सब्ज़बाग कहनेवालों को पेशेवर निराशावादी बता रहे हैं। मसला यह है कि यह लक्ष्य मोदी सरकार के नए कार्यकाल के आखिरी साल 2023-24 का नहीं, बल्कि उसके एक साल बाद का है। इसलिए लक्ष्य अधूरा रहा तो कह सकते हैं कि अभी तो एक साल बाकी है। दूसरे, 8% की विकास दर से इसकी गिनती गलत है। अब मंगल की दृष्टि..औरऔर भी
सीतारमण का बजट है पूरा राम भरोसे
हमारी अर्थव्यवस्था इस साल 12% बढ़ी और 4% महंगाई घटा दें तो जीडीपी की वास्तविक विकास दर 8% रहेगी। अगले पांच साल भी इसी दर से जीडीपी बढ़ा तो वित्त वर्ष 2024-25 तक हमारी अर्थव्यवस्था 2.7 ट्रिलियन डॉलर के वर्तमान स्तर से बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर की हो जाएगी। लेकिन एक्सेल शीट की गणना के मुताबिक 8% की दर से तब तक अर्थव्यवस्था 4.28 ट्रिलियन डॉलर ही होगी। बजट का लक्ष्य राम भरोसे। अब सोम का व्योम…औरऔर भी





