केंद्र सरकार ने कॉरपोरेट क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा उपहार दिया है, वह भी बजट से बाहर। शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की राजधानी दिल्ली नहीं, बल्कि गोवा की राजधानी पणजी में शुक्रवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में इस तोहफे या प्रोत्साहन उपाय की घोषणा की। इसके तहत कॉरपोरेट क्षेत्र को कुल 1.45 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया है। मकसद साफ है कि अर्थव्यवस्था में छाई निराशा और शेयर बाज़ारऔरऔर भी

एलआईसी बीमा व्यवसाय के निजीकरण के करीब दो दशक बाद भी देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी बनी हुई है। यह आम भारतीयों में जमी उसकी साख का प्रताप है। इससे पता चलता है कि करोड़ों भारतीय अपने जीवन का रिस्क कवर करने के लिए उस पर कितना भरोसा करते हैं। लेकिन कमाल की बात यह है कि वह देश में सबसे ज्यादा रिस्कवाले शेयर बाज़ार की सबसे बड़ी निवेशक भी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

वित्त वर्ष 2018-19 में शेयर बाज़ार से एलआईसी का लाभ भले ही घट गया हो, लेकिन मार्च 2019 में उसके निवेश का बाज़ार मूल्य 28.74 लाख करोड़ रुपए रहा जो उससे पहले के वित्त वर्ष 2017-18 में उसके निवेश के बाज़ार मूल्य 26.46 लाख करोड़ रुपए से 8.62% ज्यादा है। साथ ही 2018-19 में उसकी कुल आस्तियां पहली बार 30 लाख करोड़ रुपए के पार जाकर 31.11 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गईं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

एलआईसी ने बीते वित्त वर्ष 2018-19 में शेयर बाज़ार में कुल 68,621 करोड़ रुपए लगाए थे। इस पर उसने 23,621 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया। लेकिन इससे पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में उसने बाज़ार से 25,646 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था, जबकि तब सेंसेक्स 3348 अंक बढ़ा था। इससे बाद के वर्ष में सेंसेक्स के 5417 अंक या 17% बढ़ने पर भी एलआईसी का बाज़ार से लाभ घट जाना अशुभ संकेत है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

एलआईसी में शेयरधारक के नाते सरकार की कुल निधि 650.37 करोड़ रुपए है, जबकि उसमें करोड़ों बीमाधारकों की कुल निधि 27.92 लाख करोड़ रुपए है। यानी, सरकार की निधि के चार हज़ार गुना से भी ज्यादा। फिर भी सरकार ने एलआईसी को अपनी जायदाद समझ रखा है। उसके इस रवैये से ही इक्विटी निवेश से एलआईसी का लाभ बीते वित्त वर्ष में सेंसेक्स के 17% बढ़ने के बावजूद 7.89% घट गया। अब करते हैं मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

तेरह दिन पहले कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक में 9300 करोड़ रुपए की पूंजी डालने का फैसला किया। इसमें से 4743 करोड़ एलआईसी को लगाने हैं तो 4557 करोड़ केंद्र सरकार को। कारण, सरकार पहले ही आईडीबीआई बैंक की 51% इक्विटी एलआईसी को बेच चुकी है तो अब उसे इस डूबते बैंक को कंधा देना ही पड़ेगा। लेकिन आखिर सरकार के कहने पर वह करोड़ों बीमाधारकों का भविष्य कैसे दांव पर लगा सकती है? अब सोम का व्योम…औरऔर भी