बड़े ही बढ़ते गए, छोटे पिटते रहे
शेयर बाज़ार का अभी जो हाल है, उसमें बड़ी कंपनियां खूब रिटर्न दे रही हैं, जबकि छोटी कंपनियां पिटती ही जा रही हैं। आप जानकर चौंक जाएंगे कि जनवरी 2018 के बाद से अब तक टीसीएस का शेयर 56%, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ 53%, हिंदुस्तान यूनिलीवर 59%, कोटक बैंक 61%, एशियन पेंट्स 91% व बजाज फाइनेंस 134% बढ़ चुका है। ऐसा यूं चूंकि सभी लोग बड़ों के ही पीछे भागे जा रहे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
पहले सरकार, फिर आए निजी निवेश
पूंजी निवेश के बड़े चक्र की शुरुआत आमतौर पर सरकारी क्षेत्र से होती है। आईआरसीटीसी के आईपीओ से इसका आगाज़ हो चुका है। अब भारतीय रेल रोलिंग स्टॉक और इंजिन व कोच उत्पादन के लिए दो होल्डिंग कंपनियां बनाने जा रहा है। इसके लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से इजाजत मिल गई है। जाहिर है कि यह माहौल निजी कंपनियों के निवेश को गति देगा। इन चीजों का असर अंततः शेयर बाज़ार पर पड़ेगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
आ रहा है पूंजी-निवेश का सातवां चक्र
सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में जैसी कटौती की है, उससे भारत दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब बन सकता है। भारत इस पैमाने पर सिंगापुर व वियतनाम के बराबर आ गया है। इसलिए दुनिया की कंपनियां भारत का रुख कर सकती हैं। इससे यहां पूंजी-निवेश का नया दौर शुरू हो सकता है। आज़ादी के बाद अब तक के सात दशक में बड़े पूंजी-निवेश के ऐसे छह चक्र चल चुके हैं। आगे सातवें की तैयारी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी
संक्रमण की पीड़ा जल्द ही होगी खत्म
भारतीय अर्थव्यवस्था स्वस्थ बदलाव की दिशा में बढ़ रही है। खराब बैंक व वित्तीय कंपनियां खत्म हो रही हैं। अब तो जो एकदम फिट होंगे, वही टिक पाएंगे। सरकार भी उन धंधों से निकलती जा रही है जिसमें उसे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉरपोरेशन, बीईएमएल व शिपिंग कॉरपोरेशन जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से सरकार निकलने जा रही है। संक्रमण की पीड़ा जल्दी ही खत्म हो सकती है। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी







