धन किधर और क्यों बहता जा रहा है
जो भी निवेशक ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं, उन्हें एक बात भलीभांति समझ लेनी चाहिए कि धन का प्रवाह रोजमर्रा के शेयर बाज़ार को चलाता है। आपने जान लिया कि बाज़ार में किस तरफ धन बह रहा है और उसकी वजह क्या है तो आप दूसरों से एक कदम आगे पहुंच जाते हैं। यही एक कदम आगे निकलना आपको औरों पर बीस साबित कर देता है और बाज़ी आपके हाथ लग जाती है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
अर्थव्यवस्था नहीं, धन से फूला बाज़ार
हमारी अर्थव्यवस्था की हालत पतली है और अभी इसमें सुधार के कोई संकेत भी नहीं दिख रहे। फिर भी सेंसेक्स ने नया ऐतहासिक शिखर बना लिया तो इसकी सीधी-सी वजह है कि बाज़ार में जमकर धन आ रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने अक्टूबर में शेयर बाज़ार में 14,358 करोड़ रुपए डाले हैं जो चालू वित्त वर्ष 2019-20 में किसी भी महीने का अधिकतम निवेश है। म्यूचुअल फंड भी खरीदे जा रहे हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
बड़े ही बढ़ते गए, छोटे पिटते रहे
शेयर बाज़ार का अभी जो हाल है, उसमें बड़ी कंपनियां खूब रिटर्न दे रही हैं, जबकि छोटी कंपनियां पिटती ही जा रही हैं। आप जानकर चौंक जाएंगे कि जनवरी 2018 के बाद से अब तक टीसीएस का शेयर 56%, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ 53%, हिंदुस्तान यूनिलीवर 59%, कोटक बैंक 61%, एशियन पेंट्स 91% व बजाज फाइनेंस 134% बढ़ चुका है। ऐसा यूं चूंकि सभी लोग बड़ों के ही पीछे भागे जा रहे हैं। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
पहले सरकार, फिर आए निजी निवेश
पूंजी निवेश के बड़े चक्र की शुरुआत आमतौर पर सरकारी क्षेत्र से होती है। आईआरसीटीसी के आईपीओ से इसका आगाज़ हो चुका है। अब भारतीय रेल रोलिंग स्टॉक और इंजिन व कोच उत्पादन के लिए दो होल्डिंग कंपनियां बनाने जा रहा है। इसके लिए उसे प्रधानमंत्री कार्यालय से इजाजत मिल गई है। जाहिर है कि यह माहौल निजी कंपनियों के निवेश को गति देगा। इन चीजों का असर अंततः शेयर बाज़ार पर पड़ेगा। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी







