शिकारी कुकुरमुत्तों से सावधान!
हर तरफ वित्तीय असुरक्षा छाई हो, काम-धंधा छूटने का डर हो और कमाई ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रही हो, तब शेयर बाज़ार से नोट कमाने का लालच किसी को भी बांध सकता है। लोगों की इसी असुरक्षा और लालच का शिकार करने के लिए हज़ारों फ्रॉड बाज़ार में उतरे हुए हैं। टिप्स बांटने का धंधा बंद हुआ तो ‘विद्या’ सिखाने के इंस्टीट्यूट कुकुरमुत्तों की तरह उग आए। इनसे सावधान रहें। तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
एसआईपी का रंग चढ़ गया लोगों पर
एसआईपी का मतलब सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। रिटेल निवेशकों को नियमित निवेश का यह तरीका काफी भा गया है। जनवरी 2019 शुरू से सितंबर 2019 अंत तक हमारे शेयर बाज़ार में एसआईपी के माध्यम से 1.62 लाख करोड़ रुपए का निवेश आया है। म्यूचुअल फंडों के पास इस समय 2.84 करोड़ एसआईपी खाते हैं जिसमें निवेशकों के बैंक खाते से नियमित रूप से धन खुद कटकर फंड स्कीमों में चला जाता है। अब करते हैं शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
म्यूचुअल फंडों ने किया भरपूर निवेश
एफआईआई का निवेश जब ठंडा पड़ा था, तब देशी म्यूचुअल फंडों ने शेयर बाज़ार में जमकर निवेश किया। ताज़ा आंकडों के मुताबिक जनवरी 2018 से सितंबर 2019 तक उन्होंने शेयरों में 1.73 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया है। यह एफआईआई के निवेश से 6.4 गुना ज्यादा है। यह दिखाता है कि आम निवेशक म्यूचुअल फंडों के जरिए शेयर बाज़ार में निवेश करते जा रहे हैं। इसमें बड़ा योगदान एसआईपी का है। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी
विदेशी सुस्त रिटेल पस्त बाज़ार मस्त
विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख अक्टूबर से जाकर पलटा है। अन्यथा, वे जनवरी 2018 से लेकर 21 महीनों तक भारतीय शेयर बाज़ार से बराबर धन निकालने के ही मूड में नज़र आए। फिर भी इस दौरान सेंसेक्स व निफ्टी 15% से ज्यादा कैसे और क्यों बढ़ गए? रिटेल निवेशक तो इस दौरान मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स को लग रही मार से धराशाई हुए पड़े थे। फिर किसने चढ़ाया बाज़ार के संवेदी सूचकांकों को? अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी







