आर्थिक मोर्चे से बुरी खबरों का आना रुक नहीं रहा। औद्योगिक गतिविधियों की रीढ़ माना गया इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र भी अब अपना दुखड़ा रोने लगा है। देश के 262 ताप विद्युत संयंत्रों में 133 संयंत्रों को मांग न होने के कारण बंद करना पड़ा है। इससे पहले परिवहन में इस्तेमाल होनेवाले डीजल और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होनेवाले बिटूमेन की मांग घटने की खबर आ चुकी है। इस बीच देश के सबसे बडे बैंक एसबीआई ने अपनी रिसर्चऔरऔर भी

अर्थव्यवस्था की हालत सुधर नहीं रही तो सभी निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तरफ भाग रहे हैं। उन्हें स्थापित व बड़ी कंपनियों में सुरक्षा दिखती है जो निफ्टी व सेंसेक्स में शामिल हैं। आम निवेशकों के धन से बने म्यूचुअल फंड भी मंहगे हो जाने के बावजूद इन्हीं में निवेश बढ़ा रहे हैं। पिछले 22 महीनों में उन्होंने बाज़ार में 1.78 लाख करोड़ रुपए डाले हैं, जबकि एफआईआई निवेश 37,381 करोड़ रुपए रहा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

हमारे शेयर बाज़ार में पिछले 22 महीनों में सबसे ज्यादा मार स्मॉल और मिडकैप स्टॉक्स को झेलनी पड़ी है। जहां विदेशी व देशी धन लार्जकैप कंपनियों की तरफ बहता रहा, वहीं स्मॉल व मिडकैप कंपनियों का कोई पुछत्तर नहीं रहा। इससे अच्छा बिजनेस कर रही छोटी व मध्यम कंपनियों के भी शेयर गिरते रहे। उनसे और ज्यादा निवेश निकला, जबकि बड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ता ही गया और उनके शेयर चढ़ते ही गए। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

धन के प्रवाह से पूरा शेयर बाज़ार नहीं, उसका छोटा-सा हिस्सा चढ़ा है। एनएसई की 1500 से ज्यादा कंपनियों के एक सैम्पल के अध्ययन से पता चलता है कि उनके शेयरों के भाव जनवरी 2018 के बाद से औसतन 44% गिर चुके हैं। इस गिरावट का मध्यमान या मीडियन निकालें तो वह 53% निकलता है। हां, इतना जरूर है कि शीर्ष की 100 कंपनियों में से 55 के शेयर जमकर चढ़ गए हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

चालू वित्त वर्ष 2019-20 में अब तक म्यूचुअल फंड उद्योग में प्रति माह औसतन 9.24 लाख एसआईपी खाते जुड़े हैं। इनमें से हर एसआईपी खाते से महीने में होनेवाला औसत निवेश 2900 रुपए का है। फिलहाल स्थिति यह है कि म्यूचुअल फंडों को प्रति माह एसआईपी से लगभग 8000 करोड़ रुपए का निवेश मिल जा रहा है। माल कम बिक रहा हो, अर्थव्यवस्था सुस्त हो, फिर भी बाज़ार में निवेश आ रहा है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी