प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2024 तक भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का दावा कर रखा है। ये उसी तरह का दावा है जैसे साल 2022 तक किसानों की आय को दोगुनी करने था। हकीकत यह है कि पिछले पांच सालों में किसानों की आय घटती जा रही है। लेकिन व्यापक अर्थव्यवस्था के साथ ऐसा होने का मतलब है भारत की सारी चमक का उड़ जाना और बेरोजगारी की महामारी। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था की हालत की समग्र तस्वीर पेश करता है सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी। चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में साल भर पहले की समान अवधि की तुलना में यह 5% बढ़ा था जो 24 तिमाहियों की न्यूनतम विकास दर थी। लेकिन सितंबर तिमाही की विकास दर इससे भी बदतर होने का अंदेशा है। एसबीआई के 4.2% के बाद नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लायड इकनॉमिक रिसर्च का अनुमान 4.9% का है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

जो एसबीआई पहले सरकार का पक्ष लेकर अभी तक अर्थव्यवस्था की हालत अच्छी बताता रहा था, वह भी अब अपना टेम्पो नहीं बनाए रख पा रहा है। वह सबसे बड़ा बैंक और सरकारी ही नहीं, सरकार के सारे खाते संभालने वाला बैक भी है। जहां सब उम्मीद कर रहे थे कि पहली तिमाही में 5% तक डूबी विकास दर दूसरी तिमाही में 5.5% हो सकती है, वहीं एसबीआई का अनुमान 4.2% का है। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

इस बार का त्योहारी सीज़न खराब रहा। आम उपभोक्ता से लेकर उनके लिए सामान बनानेवाली कंपनियों के लिए। फिर भी इसे तात्कालिक मामला मानकर छोड़ा जा सकता है। लेकिन जब देश मे डीजल से लेकर बिजली तक की मांग घट रही हो और आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हों तो यह गंभीर चिंता का मसला बन जाता है। शेयर बाज़ार भले ही ऊपर से बेफिक्र दिखे, लेकिन अंदर-अंदर उसकी भी हालत खराब है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

शेयर बाज़ार बड़ा ही दगाबाज़ है। पूरा सोच-समझकर रिसर्च के बाद आपने निवेश के लिए अच्छी कंपनियां चुनीं। लेकिन बाज़ार जब उनके शेयरों को दबा डालता है, तब आपको सारी समझ व सावधानी पर संदेह होने लगता है। आपको लगता है कि आपने भारी गलती कर दी। लेकिन जब बाजार आपके विश्वास को यूं तोड़ रहा हो, अक्सर वही वक्त पूरे विश्वास के साथ खड़े हो जाने का होता है। अब तथास्तु में आज की दमदार कंपनी…औरऔर भी