गणित ऊपर लालच व डर की भावना
शेयर बाज़ार का स्वरूप गणितीय तो है। लेकिन इसमें शिरकत करनेवाला हर शख्स गणितीय नहीं होता। सभी यहां अपनी भावनाओं के साथ आते हैं। घुसते हैं लालच की भावना लेकर और भागते हैं डर की भावना में बहकर। इन्हीं दो भावनाओं की लहरों पर बाज़ार हर दिन चलता है। कभी ऊपर तो कभी नीचे। इस ऊंच-नीच और मानव स्वभाव की लय के गणित को जो आत्मसात कर लेता है, वही यहां जीतता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी
कायदे से समझ लें बाज़ार का गणित
शेयर बाज़ार समेत सारी वित्तीय बाजार का स्वरूप गणितीय है। यह बाज़ार में भाग लेनेवालों के खरीदने और बेचने के फैसलों का प्रभावी परिणाम होता है, योगफल नहीं। खरीदने वाले ने जितना दिया, बेचने वाले ने जितना पाया, उसका जोड़ शून्य निकलता है। हां. बिचौलियों का कमीशन ज़रूर दोनों की जेब से निकल जाएगा। लेकिन खरीदने की लालसा ज्यादा है कि बेचने की बेचैनी, इसी से भाव उठते-गिरते हैं, बाज़ार चलता है। अब गुरु की दशा-दिशा…और भीऔर भी
यहां नहीं फलता अंधेरे में तीर चलाना
शेयर बाज़ार के बारे में बाहर के लोगों ने बहुत सारी कहानियां, बहुत सारी धारणाएं फैला रखी हैं। इनमें से बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो कभी बाज़ार में गहरे धंसे ही नहीं। आए भी तो सतह पर छिछली खिलाकर चले गए। यह न तो जुए का अड्डा है, न ही कैसिनो को खेल। यहां पक्का कुछ नहीं तो प्रायिकता समझकर अनुमान लगाना पड़ता है। लेकिन अंधेरे में तीर चलाना कतई नहीं फलता। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी
पूंजी संभालते हुए लेना कितना रिस्क!
ट्रेडर को अपनी रुचि व धार खोजने के बाद वित्तीय बाज़ार से नियमित कमाने के लिए कुछ ज़रूरी बातें सीखनी पड़ती है। मसलन, पूंजी को कैसे संभालें, रिस्क कितना लेना है और बाज़ार में जो चल रहा है, आखिर उसके कारण व कारक क्या हैं? बफेट के दो नियमों की बारम्बार चर्चा होती है। पहला यह कि हमेशा अपनी मूल पूंजी बचाकर रखें और दूसरा नियम यह कि पहला नियम कभी न भूलें। अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी
पहले खुद को खोजो, फिर बाज़ार को
वित्तीय ट्रेडिंग का काम उतना जटिल नही है जितना हम समझते हैं। ऊपर से, एक बार सध जाए तो हम घर बैठे इतना कमा सकते हैं कि अपना और अपने परिवार का गुजारा मजे मे चल जाए। इसमें कुछ लोगों को शेयर बाज़ार जमता है तो कुछ को कमोडिटी या फॉरेक्स बाज़ार। आपको कौन-सा बाज़ार जमता है, यह आपको खोजकर निकालना होगा। फिर तो बस काम करना है। लेकिन अपनी मूल पूंजी बचाकर। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी





