ध्यान रखें कि जब भी बड़ी घटना, खबरों या काफी उथल-पुथल का दिन होता है, तब वित्तीय बाज़ार में रिस्क या अनिश्चितता बहुत बढ़ जाती है। संभव है सब शांति से निपट जाए। लेकिन चूंकि उस दिन अनिश्चितता बढ़ी होती है, इसलिए रिटेल ट्रेडर को बाज़ार से दूर रहने के फैसले पर अडिग रहना चाहिए। इसलिए मौद्रिक नीति, कंपनियों के नतीजों, बजट या डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

रिटेल ट्रेडर के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है लॉन्ग या खरीदने के सौदे करना। यहीं न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न के अवसर मिलते हैं। लेकिन कभी-कभी घबराहट भरी बिकवाली का ऐसा दौर आता है, जो काफी लम्बा खिंच सकता है, जब लॉन्ग ट्रेड के कमाई के अवसर बहुत कम होते हैं। ऐसे दौर में ट्रेडर को रोजमर्रा के बाज़ार से हटकर दो-चार महीने से लेकर चार-पांच साल तक का निवेशक बन जाना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

इस हकीकत से इनकार नहीं कि वित्तीय बाजार में गिरने के वक्त जमकर कमाया जा सकता है। बहुतेरे ट्रेडर हैं जिन्होंने शॉर्ट-सेलिंग से करोड़ों कमाए हैं और अब भी कमा रहे हैं। लेकिन यह शॉर्ट-सेलिंग डेरिवेटिव सौदों में ही संभव है जिसके लिए काफी पूंजी चाहिए। इतनी कि चार-पांच लाख डूब जाएं तो कोई फर्क न पड़े। इतना भारी रिस्क जमकर रिटर्न देता है। लेकिन क्या रिटेल ट्रे़डर इतना जोखिम उठा सकता है? अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी

रिटेल ट्रेडर ज्यादा रिस्क नहीं ले सकता। उसके पास सीमित पूंजी होती है जो अगर डूब गई तो रिस्क छोड़िए, वह ट्रेडिंग ही नहीं कर सकता। उसे दो सार्वकालिक नियमों का पालन करना होता है। पहला नियम, हमेशा अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना और दूसरा नियम, हमेशा पहले नियम को याद रखना। इस समय शेयर बाज़ार में रिस्क अपने अधिकतम स्तर पर पहुंचा हुआ है तो न्यूनतम रिस्क की कोई गुंजाइश ही नहीं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी