शेयर बाज़ार में सारा खेल अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए दूसरों की भावनाओं को समझने और उसका फायदा उठाने का है। यह सुनने में बड़ा निर्मम लगता है। लेकिन युद्ध और बाज़ार में ऐसी ही निर्ममता चलती है। दूसरों की भावना भावों के चार्ट पर दिख जाती है। चार्ट देखना आ जाए तो आपको साफ दिखने लगेगा कि कहां भावनाएं और कहां बुद्धि सक्रिय है। आपको हमेशा बुद्धि के साथ रहना है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

भावनाएं अस्थिर हों, किसी भी वजह से उनमें उबाल या सुस्ती आई हो तो हमारी बुद्धि नहीं काम करती। हम अधीर हो जाते हैं। यह ऐसी अवस्था है जब कोई भी वित्तीय बाज़ार में आपको शिकार बना सकता है, भले ही आप कितने बड़े महारथी क्यों न हों। इसीलिए नियम है कि जब भी घर-परिवार या दोस्तों से झगड़ा हुआ हो, तब ट्रेडिंग से दूर रहें। अन्यथा, आप अपना नुकसान कर बैठते हैं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

भावनाओं का सारा समीकरण बाज़ार के भावों में दिख जाता है। इनका सारा ग्राफ भावों के दैनिक और साप्ताहिक चार्ट में झलकता है। ऊपर से कुछ दिन, हफ्तों, महीनों व सालों के मूविंग औसत का गणित बाज़ार में सक्रिय भावनाओं का सामूहिक पैटर्न बता देता है। दस-बीस साल पहले यह हिसाब-किताब लगाना बेहद कठिन था। आज सब कुछ कंप्यूटर के चंद बटन कर देते हैं। हमारा काम बुद्धि और धैर्य का इस्तेमाल है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार का स्वरूप गणितीय है। लेकिन वहां हर पल काम करनेवाली मानव भावनाएं अक्सर सारा गणित फेल कर देती हैं। कहने का मतलब यह नहीं कि भावनाओं का कोई गणित या समीकरण नहीं होता। डर और लालच की भावना का तो सीधा गणित होता है। लेकिन जब ये शेयर बाज़ार में काम करती हैं, जहां आज एक नहीं, अनेक देशों के लाखों ट्रेडर सक्रिय होते हैं तो समीकरण रैखिक नहीं रह जाता। अब सोमवार का व्योम…और भीऔर भी

न जीवन और न ही बाज़ार में हमेशा मनचाहा होता है। सभी चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़े। लेकिन लगातार सात तिमाहियों से उसकी विकास दर घटती जा रही है। उम्मीद थी कि रिजर्व बैंक विकास को बढ़ाने के लिए ब्याज घटा देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हर कोई चाहता है कि जिन शेयरों में उसने धन लगाया है, वे बराबर बढ़ते रहें। लेकिन ऐसा नहीं होता। निवेश की इस हकीकत के बीच एक और कंपनी…औरऔर भी