शेयर बाज़ार के शीर्ष सूचकांक निफ्टी व सेंसेक्स दोनों जब नए ऐतिहासिक शिखर पर हों, तब इनमें शामिल किसी ब्लूचिप कंपनी के शेयर का साल भर में 14% से ज्यादा गिर जाना गले नहीं उतरता। वह भी तब, जब वह निफ्टी-50 में अकेले 4.5% वजन रखती है और उसी की समकक्ष बहुराष्ट्रीय कंपनी का शेयर साल भर में 15% से ज्यादा बढ़ चुका है। आज तथास्तु में वही ब्लूचिप कंपनी जो निफ्टी-50 से लगभग 28% सस्ती है…औरऔर भी

पूंजी, बुद्धि, सतर्कता, धैर्य और लचीलापन। यह वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाई का बुनियादी आधार है। अहंकार-रहित होना भी ज़रूरी शर्त है। फिर भी अगर बाज़ार से सौ लोग कमाते हैं तो बहुत संभव है कि सबकी अपनी अलग शैली हो। असल में ट्रेडिंग में खटाखट फैसला लेना होता है तो इसमें हर किसी को वही स्टाइल पकड़नी चाहिए जो उसके व्यक्तित्व के माफिक पड़ती है। अन्यथा दूसरे उसे रौंद डालेंगे। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

बड़ा आसान लगता है शेयर बाजार या वित्तीय बाज़ार के किसी अन्य हिस्से से पैसा बनाना। लेकिन यह नौसिखिया लोगों का नहीं, उस्तादों का बाज़ार है। यहां वही उस्ताद बाज़ी जीतते हैं जिनके पास पूंजी, बुद्धि, धैर्य, सतर्कता और लचीलापन है। यहां वही लोग नियमित कमाई कर पाते हैं जो अपने झूठे गुरूर को खुद पैरों तले रौंदकर रखते हैं, जो गलती का आभास होते ही दांव से पीछे हट जाते हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग ऐसा धंधा है जहां कुछ लोग कमाते और ज्यादातर लोग गंवाते हैं। हालांकि इधर स्थिति सुधरती जा रही है। लेकिन अब भी गंवानेवालों का अनुपात बहुत ज्यादा है। आठ-दस साल पहले तक हालत यह थी कि शेयर, कमोडिटी व फॉरेक्स बाज़ार में 95% गंवाते और केवल 5% कमाते थे। अब यह अनुपात थोड़ा सुधरकर 88% और 12% का हो गया है। लोग जितना जानते जाएंगे, गंवानेवाले उतना घटते जाएंगे। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी