सावधान! बाज़ार कपड़े न उतरवा डाले
अचानक कुछ ऐसा घट जाता है जिसके बारे में किसी ने दूर-दूर तक सोचा भी नहीं था। यह अनिश्चितता आमजीवन में चलती है और लोगबाग इसका सदमा झेलते रहते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार में तो सभी इसी अनिश्चितता या रिस्क से खेलने आते हैं। कहा जाता है कि रिस्क जितना ज्यादा, रिवॉर्ड या प्रतिफल उतना ज्यादा। लेकिन ध्यान रहे कि बिना वाजिब तैयारी के उतरने पर बाज़ार आपके कपड़े उतरवा लेता है। अब मंगलवार की दृष्टि…और भीऔर भी
सब अनिश्चित, कुछ भी निश्चित नहीं
वित्तीय बाज़ारों के बारे में अमिट सच है कि यहां पहले से कुछ भी निश्चित नहीं। इस बाज़ार में आप उतरते हैं तो समझिए कि अनिश्चितता की भंवर में छलांग लगा रहे हैं। इसमें से कुछ भी माणिक, मोती निकालकर लाने के लिए आपको तैराक ही नहीं, कुशल तैराक होना ज़रूरी है। नहीं तो धारा में जमे बड़े-बड़े मगरमच्छ आपको आसानी से शिकार बना डालेंगे। लालच किया या डरकर भागे तो पक्का मरोगे। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
सच है कि हस्ती नहीं मिटती हमारी!
भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक ताकत इतनी जबरदस्त है कि सरकार गलत से गलत नीतियां अपना लें, फिर भी यह पलटकर उठ खड़ी होती है। सरकार की अनीति और सच्चाई को ही नकारने के चलते हमारी आर्थिक विकास दर घटती जा रही है। लेकिन आश्चर्य है कि जनवरी 2020 में हमारा परचेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) आठ साल के रिकॉर्ड शिखर पर पहुंच गया। मतलब, देश का मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र उठने लगा है। अब तथास्तु में आज की कंपनी…और भीऔर भी
आम नियम में खास पर भी रहे ध्यान
स्टॉप-लॉस का सर्वमान्य 2%-6% का नियम मौटेतौर पर सही है। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग के बिजनेस में महज इतनी लागत से कमाने की गारंटी होती तो हर कोई यही धंधा कर रहा होता। दरअसल स्टॉप-लॉस लगाते वक्त हमें बहुत सतर्क रहना होता है और आम नही, खास परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होता है। कभी-कभी जिस आधार पर हमने सौदा शुरू किया होता है, वह आधार ही गायब हो जाता है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…और भीऔर भी







