निवेश का कोई सुनहरा क्षितिज नहीं, जिसके पार अच्छे ही अच्छे अवसर हों। हर निवेश में रिस्क है। यह रिस्क शेयरों में सर्वाधिक है। बैंक जमा का रिस्क पीएमसी बैंक ने साफ कर दिया। इसलिए ‘2020 के ट्वेंटी-ट्वेंटी’ महज जुमला है। फिर भी ज़माने के साथ चलना है तो हम भी आज तथास्तु में नए साल के लिए 20 स्टॉक्स पेश कर रहे हैं। इन सभी पर यहां पहले विस्तार से लिखा जा चुका है।और भीऔर भी

अर्थनीति कभी सच को नज़रअंदाज़ नहीं करती। लेकिन हमारी मौजूदा राजनीति का हाल गजब है कि वह झूठ पर ही फल-फूल रही है। हकीकत स्वीकार लेने से उसकी तौहीन होती है। अन्यथा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं कह सकते थे कि पांच साल पहले देश की अर्थव्यवस्था तबाह हो रही थी जिसे उनकी सरकार ने संभाल लिया। वे स्वीकार करने को तैयार नहीं कि आज आर्थिक विकास की स्थिति बदतर हो चुकी है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

बाज़ार बढ़ने का मतलब कतई यह नहीं कि यहां हर कोई माने बैठा है कि हमारी अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत बहुत अच्छी चल रही है। सच्चाई से किसी का इनकार नहीं। लेकिन चूंकि इफरात धन सीमित स्टॉक्स का पीछा कर रहा है तो उनके भाव बढ़ते जा रहे हैं और निफ्टी व सेंसेक्स नया ऐतिहासिक शिखर बना रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से विदेशी संस्थाओं ने भी खरीद बढ़ा दी है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

कहा जा सकता है कि शेयर बाज़ार पूरी अर्थव्यवस्था का नहीं, बल्कि कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है, वह भी केवल ढाई-तीन हज़ार लिस्टेड कंपनियो का। इसमें भी जिन शीर्ष सूचकांकों से हम बाज़ार की स्थिति मापते हैं, उनमें तो 30 से लेकर 50 कंपनियां ही शामिल हैं। इनके शेयर चढ़ रहे हैं तो शेयर बाज़ार चढ़ता दिखाई देता है, जबकि बाकी छोटी व मझोली कंपनियों के शेयर डूबते ही जा रहे हैं। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी