अर्थव्यवस्था के साथ-साथ हमारे कॉरपोरेट क्षेत्र की हालत भी खस्ता चल रही है। यह हकीकत रिजर्व बैंक की एक ताज़ा रिपोर्ट में स्वीकार की गई है। इस रिपोर्ट में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की 2696 कंपनियो का लेखा-जोखा लिया गया है। उसका कहना है कि इन कंपनियों का शुद्ध लाभ सितंबर 2019 की तिमाही में साल भर पहले से 54.3% कम रहा है। इसकी सीधी वजह उनके उत्पादों की मांग का काफी घट जाना है। अब सोमवार की दृष्टि…औरऔर भी

शेयर बाज़ार चढ़ता ही जा रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था डूब रही है। यह हमारे या आपके लिए ही नहीं, बल्कि देश के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रह्मण्यन तक के लिए दुरूह पहेली है। उन्होंने गुरुवार को आईआईएम अहमदाबाद में फाइनेंस, अर्थव्यवस्था व मार्केटिंग में बर्ताव संबंधी विज्ञान के एनएसई केंद्र के उद्घाटन करते हुए छात्रों से कहा कि यह पहेली सुलझा लो तो वे अमेरिका से उनके पास आ जाएंगे। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

अपना स्वभाव समझना, अपनी भावनाओं का तंत्र जानना और शेयर बाजार के काम करने के तरीके व उसके पीछे के मनविज्ञान को समझना। इसी में छिपा है यहां से कमाने का सूत्र। साथ ही टेक्निकल एनालिसिस के कैंडल के रूप, उसके स्थान के महत्व, कुछ मूविंग औसत व आरएसआई जैसे चुनिंदा संकेतकों की भाषा समझनी पड़ती है। यह रॉकेट साइंस जैसा कठिन काम नहीं, बल्कि आसान है। सब कुछ साधा जा सकता है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग से नियमित कमाना है तो बिजनेस चैनल देखने की आदत छोड़नी पड़ेगी। किसी स्टॉक में ट्रेडिंग के लिए रिटेल ट्रेडर को जितनी जानकारी चाहिए, वह उसके भावों में जज्ब होती है। इनसाइडर या अंदरूनी सूचनाओं पर आधारित ट्रेडिंग को छोड़ दें तो संस्थाएं भी भावों और उसके पीछे के मनोविज्ञान को समझ ट्रेड करती है। हम भी इस मनोविज्ञान को समझ लें तो बाज़ार से बराबर कमा सकते हैं। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

ट्रेडिंग के लिए बाहर की सलाहें तभी तक ज़रूरी होती हैं, जब तक आपका आत्मविश्वास नहीं बन जाता। उसी तरह जैसे बच्चों की साइकिल में सीखते समय पीछे के पहिए के अगल-बगल दो छोटे पहिए लगे होते हैं। आत्मविश्वास जमने के बाद किसी एक्सपर्ट की सलाह की दरकार नहीं होती। गांठ बांध लीजिए कि अचूक सलाह देने का दावा करनेवाले दरअसल सलाह बेचने का धंधा कर रहे हैं, आपको फायदा पहुंचाने का नहीं। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी