पिछले 30 दिनों में निफ्टी 26.59% गिरा है, जबकि रिलायंस 24.60%, इनफोसिस 17.96%, एचडीएफसी 23.76%, लार्सन एंड टुब्रो 32.29% और एचडीएफसी बैंक 25.02% गिर चुका है। जाहिर है, ऐसी मजबूत कंपनियों के शेयर आंधी में ज़मीन पर टपके पक्के आम की तरह हैं जिन्हें उठा लेना एक-दो साल में फायदे का सौदा साबित हो सकता है। इस वक्त बाज़ार में निवेश के अवसरों की कमी नहीं। ऐसे में आज तथास्तु में महज जानने के लिए एक कंपनी…औरऔर भी

बाज़ार गिर रहा हो तो शॉर्ट-सेलिंग उसे गिराती ही चली जाती है। गिरावट जब बहुत ज्यादा बढ़ जाती है तो मांग उठती है कि शॉर्ट-सेलिंग पर रोक लगा दी जाए। हफ्ते भर पहले सेबी ने कुछ स्टॉक फ्यूचर्स की पोजिशन लिमिट आधी कर दी, इंडेक्स डेरिवेटिव्स में शॉर्ट-सेलिंग की सीमा बांध दी और कुछ शेयरों पर मार्जिन दर बढ़ा दी। मकसद था बाज़ार की उथल-पुथल को रोकना। वैसे, इधर शॉर्ट-कवरिंग भी चली है। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी

शेयर बाज़ार के गिरने पर लोग शॉर्ट-सेलिंग, खासकर ऑप्शंस ट्रेडिंग का रुख करते हैं। मगर, ऑप्शंस में अभी कमाने की कम और गंवाने की प्रायिकता बेहद ज्यादा है। दरअसल, डर व घबराहट का सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 24 मार्च को 86.6350 की चोटी पर पहुंच गया तो ऑप्शंस सौदा उल्टा पड़ने की आशंका इस समय चरम पर है। पहले इसका उच्चतम स्तर वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 17 मार्च 2008 को 85.13 का था। अब गुरु की दशा-दिशा…औरऔर भी

पिछले कुछ हफ्तों से जब से शेयर बाज़ार में भारी गिरावट व अनिश्चितता का सिलसिला शुरू हुआ है, तभी से हम बराबर कह रहे हैं कि रिटेल ट्रेडरों को बाज़ार से दूर रहना चाहिए। अन्यथा, वे संस्थाओं की चक्की में पिसकर रह जाएंगे और पलक झपकते ही अपनी ट्रेडिंग पूंजी गवां बैठेंगे। फिर, जब ट्रेडिंग पूंजी ही नहीं रहेगी तो ट्रेड कहां से करेंगे। अपनी पूंजी सुरक्षित रखना ट्रेडिंग का मूलभूत नियम है। अब बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी