बनाना होगा खुद अपना ट्रेडिंग सिस्टम
जो लोग भी शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से नियमित कमाई करना चाहते हैं, उन्हें नासिब निकोलस तालेब की दो किताबें ‘द ब्लैक स्वान’ और ‘फूल्ड बाय रैंडमनेस’ ज़रूर पढ़ लेना चाहिेए। ये किताबें आपको शेयर बाज़ार के मूल स्वभाव से अवगत करा देंगी। उस फ्रेम में फिर आपको अपना ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करना होगा। इसमें चाहें तो फंडामेटल व टेक्निकल एनालिसिस को मिला सकते हैं। नहीं तो केवल टेक्निकल। अब बुधवार की बुद्धि…और भीऔर भी
अनिश्चितता में प्रायिकता ही है सीमा
शेयर बाज़ार का पूरा और अलग-अलग स्टॉक्स का स्वभाव पूरी तरह रैंडम है। उसकी चाल को किसी पक्के नियम में नहीं बाधा जा सकता। बहुत हुआ तो दो-चार, दस दिन या एकाध महीने में उठने-गिरने की प्रायिकता निकाली जा सकती है। ऐसी अनिश्चितता के बीच ट्रेडिंग की बाहरी सलाहें केवल अपना धंधा चमकाने के लिए होती हैं। वे चाहें भी तो किसी स्टॉक या इंडेक्स के उठने-गिरने का पक्का स्तर नहीं बता सकते। अब मंगल की दृष्टि…औरऔर भी
बाहरी सलाह से कमाई नहीं, बंटाधार
कहने को हम कह सकते हैं कि जिस केयर रेटिग्स को सोमवार को 525 पर खरीदने को कहा था, वो उस दिन एंट्री का मौका देने के बाद पांच दिन के अंदर ही 27.13% बढ़त के साथ 668 पर पहुंच गया, वह भी शुक्रवार को 4.17% गिरने के बाद। लेकिन हम यही कहते हैं कि अगर आप बाहरी सलाह लेकर शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से कमाना चाहते हैं तो यह सोच आत्मघाती है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
कंपनी मजबूत तो शेयर भी चमकेंगे
कंपनियों की मूलभूत मजबूती कभी-कभी उनके शेयरों के भाव में नहीं झलकती। ऐसा प्रायः कम अवधि, कुछ महीने या साल तक होता है। लंबी अवधि में शेयरों के भाव कंपनी की मजबूती पकड़ लेते हैं। इसीलिए लंबी अवधि का निवेश छोटी अवधि की ट्रेडिंग से कम रिस्की होता है। इस पर अगर कंपनी के पास विपुल आस्तियां हों तो अंततः उसका दम शेयरों में दिख ही जाता है। तथास्तु में आज ऐसी ही विपुल आस्तियों वाली कंपनी…औरऔर भी






