खुद को औरों का शिकार ना बनने दें!
शेयर बाज़ार में निवेश उनके लिए, जिनके पास रोजमर्रा व आकस्मिक ज़रूरतों के इंतज़ाम के बाद अतिरिक्त धन बच जाता है, वहीं ट्रेडिंग उनके लिए है जिनके पास कहीं ज्यादा इफरात धन है। आज जब अपने यहां नौकरी-धंधों में मंदी छाई है तब लोग घबराहट व लालच में शेयर बाज़ार की ओर भाग रहे हैं। यह मनःस्थिति उन्हें आसानी से औरों का शिकार बना सकती हैं और उनका बचा-खुचा सुरक्षा-कवच टूट सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी
शेयर-भावों के पीछे कैसे अदृश्य हाथ!
ऊपर-ऊपर दिखते हैं शेयरों के भाव। लेकिन उनके पीछे होती है अदृश्य हाथों की सम्मिलित व सामूहिक ताकत। भावों के पैटर्न से हम शेयरों का स्वभाव जान सकते हैं। लेकिन शेयरों का स्वभाव उन लोगों से बनता है जो अपने स्वभाव से उन कंपनियों व स्टॉक्स की तरफ खिंचे चले जाते हैं और नियमित रूप से उन्हीं में ट्रेड करते हैं। हमेशा याद रखें कि शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग धनवानों का खेल है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
लालच में लपके, डर गए तो छिटके!
लालच व डर की भावनाएं ही शेयर बाज़ार को चलाती हैं। मार्च में कोरोना का प्रकोप बढ़ा। देश में लॉकडाउन का सिलसिला शुरू हुआ। बाज़ार इतना गिरा कि बढ़ने का लालच बढ़ गया। इसमें फंसकर लॉकडाउन के दौरान 12 लाख से ज्यादा नए निवेशकों ने डिमैट खाते खुलवा डाले। फिर, डर बढ़ने लगा तो जून में इक्विटी म्यूचुअल फंडों में आया शुद्ध निवेश मई की अपेक्षा 95% से ज्यादा घट गया। अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी
पर्याप्त है सौ-पचास स्टॉक्स में ट्रेडिंग
शेयरों का स्वभाव हम पिछले पांच साल, तीन साल, एक साल, तीन महीने, हफ्ते या उसके दैनिक भावों का चार्ट देखकर जान सकते हैं। असल में समूचा शेयर बाज़ार ही नहीं, बल्कि अलग-अलग शेयरों के भाव भी खास पैटर्न में चलते हैं। थोड़ा-बहुत ही इधर-उधर होता है। चूंकि हम रोज़ाना ट्रेड हो रहे करीब 1950 शेयरों को नहीं पकड़ सकते तो हमें ट्रेडिंग के लिए निफ्टी-50 और निफ्टी नेक्स्ट-50 तक सीमित रहना चाहिए। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी







