अब तो बिचौलिये ब्रोकर का भी झंझट खत्म होनेवाला है। पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, सेबी रिटेल निवेशकों को सीधे बाज़ार तक पहुंच (डीएमए) देने पर विचार कर रही है। यह सुविधा अभी तक संस्थागत निवेशकों को उपलब्ध है। सेबी की पेशकश लागू हो जाने पर हमारे-आप जैसे आम निवेशक व ट्रेडर सीधे-सीधे बीएसई और एनएसई से डील करेंगे। ब्रोकर हटा तो खर्च भी थोड़ा घट सकता है। मतलब, शेयर बाज़ार की राह आसान। अब बुध की बुद्धि…औरऔर भी

बाहर से बेहद आसान लगता है शेयर बाज़ार से कमाना। सारी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर है और सारा माल-मत्ता बाज़ार में। हर स्टॉक के पल-पल के भाव, कंपनी के पूरे के पूरे वित्तीय नतीजे। ऊपर से वोल्यूम और ओपन इंटरेस्ट का सारा डेटा। साथ ही भावों के चार्ट के साथ जितने चाहो, उतने इंडीकेटर्स का फ्लो। सब कुछ मुफ्त में। समय व ध्यान लगाओ और बाज़ार से मनचाहा धन बटोर लो! अब मंगलवार की दृष्टि…औरऔर भी

अगर अपने यहां कमाने के अच्छे अवसर होते तो हर पांच-दस साल पर घोटालों से घिरे शेयर बाज़ार में इतने-सारे लोग ट्रेडिंग से कमाने की दौड़ नहीं लगाते। महाराष्ट्र व गुजरात में तो लोगबाग पतंगों की तरह शेयर बाज़ार की आग में कूदते हैं, यह भूलकर कि उनसे पहले अधिकांश आम लोग इसमें अपनी जमा-पूंजी स्वाहा कर बैठे हैं। उनको लगता है कि यह धन की खुली खिड़की/बाज़ार है, हाथ डालो और निकालो। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

आनेवाले हफ्ते और महीने भारतीय शेयर बाज़ार के लिए बड़े उथल-पुथल भरे हो सकते हैं। प्रधानमंत्री दावा करते रहें कि सही समय पर सही फैसले लेने से हम कोरोना के मामले में संभले हुए हैं। लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों से भारत दुनिया में अमेरिका व ब्राज़ील के बाद तीसरे नंबर पर है तो इसे संभलना कैसे कह सकते हैं! कहीं बाज़ार को कोरोना का दूसरा ज़ोरदार झटका लग गया तो! अब तथास्तु में आज की कंपनी…औरऔर भी

ट्रेडिंग में नज़र साफ करने के झंझट कम नहीं। एनएसई की वेबसाइट से डेरिवेटिव्स की भाव कॉपी डाउनलोड करो। फिर उसमें से केवल फ्यूचर्स का डेटा निकालो। फिर हर स्टॉक में इस महीने, अगले महीने और दूर के महीने के ओपन इंटरेस्ट पर नज़र डालो। उनकी घट-बढ़ को स्टॉक के भाव के साथ जोड़कर देखो। फिर उनमें से 2-4 स्टॉक चुनकर निकालो। इतनी मशक्कत के बाद उनके भावों को अनेक इंडीकेटर पर परखो। अब शुक्र का अभ्यास…औरऔर भी