स्टॉक ट्रेडिंग शुद्ध बिजनेस, तफरी नहीं
शेयरों में दीर्घकालिक निवेश बैक एफडी या प्रॉपर्टी में धन लगाने जैसा काम है। लेकिन शेयर बाज़ार में की गई ट्रेडिंग विशुद्ध बिजनेस है। इस पर टैक्स-निर्धारण भी उसी हिसाब से होता है। निवेश में धन लगाकर हम सालों तक के लिए भूल सकते हैं। लेकिन वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में किसी भी बिजनेस की तरह पल-पल की हलचलों पर ध्यान देना पड़ता है। स्टॉप-लॉस में गया धन इस बिजनेस की लागत है। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी
कंपनी सरकारी, ग्रहण सरकार का
जब बाड़ ही खेत को खाने लगे तो खेत बेचारा क्या करे! इस समय जनता के टैक्स और बड़ी मेहनत व महत्वाकांक्षा से बनाई गई सरकारी कंपनियों का यही हाल हो गया है। मोदी सरकार ने ओएनजीसी जैसी मजबूत कंपनियों को खोखला बना दिया, बीपीसीएल जैसी कंपनियां बेच रही है, जबकि स्टील अथॉरिटी जैसी बहुतेरी कंपनियों का हाल बेहाल कर दिया। फिर भी कुछ सरकारी कंपनियों अब भी मजबूत हैं। आज तथास्तु में ऐसी ही एक कंपनी…औरऔर भी
सलाह नहीं, स्वानुशासन आए है काम
शेयरों की ट्रेडिंग से कमाना है तो दूसरे की सलाह नहीं, बल्कि अपने सिस्टम और अनुशासन पर चलें। इसका पहला कारण यह है कि पूंजी आपकी लगी है, दूसरे की नहीं। दूसरा यह कि पल-पल बदलते भावों में आपका सिस्टम और अनुशासन नहीं रहा तो आप कभी भी फिसल जाएंगे। बफेट के दो नियम जानते ही होंगे। पहला, हमेशा अपनी ट्रेडिंग पूंजी बचाकर चलें और दूसरा यह कि पहला नियम बराबर याद रखें। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी
आसान राह के हादसे बड़े तकलीफदेह
शेयर बाज़ार की ‘आसान, सरल व सुलभ’ राह पर चलते-चलते जब अचानक वास्तविक सच्चाई से हमारा वास्ता पड़ता है, तब पता चलता है कि बड़ी मशक्कत से जोड़ी गई बचत कैसे देखते ही देखते एक झटके में स्वाहा हो जाती है। दो-चार हज़ार भी डूब जाएं तो हम घबरा जाते हैं, भयंकर असुरक्षा छा जाती है। लेकिन संस्थाएं रोज़ाना करोड़ों दांव पर लगाती हैं। फिर भी बगैर किसी असुरक्षा के जमकर कमाती हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी







