हिंदी के मशहूर जनकवि बाबा नागार्जुन की कविता हैं, “बहुत दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास। बहुत दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास। बहुत दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त, बहुत दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त। दाने आए घर के अंदर बहुत दिनों के बाद, धुआं उठा आंगन से ऊपर बहुत दिनों के बाद।” 75 दिन खिंचा लॉकडाउन बीतने पर ऐसा ही कुछ लगता है। अब सोमवार का व्योम…और भीऔर भी

जिसने दस साल पहले रिटायरमेंट का प्लान बनाकर सीधे स्टॉक्स और इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश किया होगा, वह आज कोरोना के झटके से थोड़ा उबरने के बावजूद रो रहा होगा क्योंकि इस दौरान उसके दस लाख रुपए बीस लाख भी नहीं हुए होंगे और बमुश्किल 7% चक्रवृद्धि रिटर्न मिला होगा। इसलिए हमें ऐसी आकस्मिकताओं पर पहले से सोचकर निवेश करना चाहिए। आज तथास्तु में एक ऐसी कंपनी जो इस तरह की आपदाओं से ऊपर है…औरऔर भी

जून महीने के डेरिवेटिव सौदों में निफ्टी ऑप्शन का शुक्रवार से गुरुवार तक का पहला चक्र कल पूरा हो गया। इस दौरान निफ्टी 4.68% बढ़ा है। 29 मई को निफ्टी 9580.30 पर बंद हुआ था, जबकि कल 4 जून को उसका बंद स्तर 10,029.10 का रहा है। आइए, देखते हैं कि हमने शुक्रवार के भावों के आधार पर निफ्टी ऑप्शंस में ट्रेडिंग के जो चार तरीके अपनाए थे, उनका अंततः क्या हश्र हुआ है। बटरफ्लाई स्प्रेड: बटरफ्लाईऔरऔर भी

ऑप्शन राइटर बाज़ार के बेहद मंजे हुए खिलाड़ी होते हैं। वे ऐसे ही स्ट्राइक मूल्य के ऑप्शन बेचने की जुगत में लगे रहते हैं जिनमें उनको मिला हुआ प्रीमियम हाथ से निकल जाने की गुंजाइश ही न रहे। वे बहुत ज्यादा लालच नहीं करते, लेकिन ज्यादा से ज्यादा ऑप्शन बेचकर अपनी प्रीमियम आय बढ़ाने में लगे रहते हैं। दूसरी तरफ ऑप्शन खरीदनेवाले हैं, जिनमें से अधिकांश रिटेल ट्रेडर हैं और ज्यादा लालच में फंसकर अपना प्रीमियम गंवातेऔरऔर भी

हमने ऑप्शन के भावों को समझने के दौरान पाया कि इसे निर्धारित करने में वोलैटिलिटी, विशेष रूप से इम्प्लायड वोलैटिलिटी बहुत अहम भूमिका निभाती है। इसी तरह की वोलैटिलिटी को एनएसई का एक सूचकांक हर दिन पेश करता है। वो है India VIX जो निवेशकों में छाई धारणा को दिखाता है कि एक्सपायरी तक निफ्टी कितना ऊपर या नीचे हो सकता है। यह असल में ऑप्शंस के प्रीमियम की इम्प्लायड वोलैटिलिटी की माप है। साथ ही इससेऔरऔर भी