कोरोना की महामारी किसी बिजनेस के लिए बुरी है तो किसी के लिए अच्छी। मसलन, मार्च, अप्रैल व मई के कोरोना काल में पारले प्रोडक्ट्स की बिकी आठ दशको में सबसे ज्यादा बढ़ी है। इसमें 80-90% योगदान पारले-जी बिस्किट का है। इस दौरान एफएमसीजी व दवा कंपनियों का भी धंधा बढ़ा है। दूसरी तरफ देश की सबसे बड़ी कार निर्माता मारुति को कोरोना के चलते मई में उत्पादन 98% घटा देना पड़ा है। अब शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

प्रतिस्पर्धा, निष्पक्षता, उद्यमशीलता, मांग, सप्लाई व न्याय जैसे मूल्य बाज़ार का अभिन्न हिस्सा माने जाते हैं। लेकिन बाज़ार के साथ सब निष्पक्ष ही नहीं होता। रिलायंस ने कोरोना काल की घनघोर निराशा के बीच भी बाज़ार से जिस तरह से 1.51 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा जुटा लिए हैं, वह कमाल की बात है। लेकिन यह कमाल हासिल करने में सेबी, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और वित्त मंत्री तक ने उसकी मदद की है। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

थोड़े दिनों की विपत्ति सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा सिखाकर चली जाती है। कोरोना संकटकाल में शेयर बाज़ार ने भी हमें बहुत सारी सीख दी है। जैसे, खराब माहौल में मजूबत कंपनियों के शेयर गिरें तो उन्हें बेहिचक खरीद लें। रिलायंस 23 मार्च को 866.98 तक गिर गया था। लेकिन ढाई महीने बाद 8 जून को वही शेयर 1618.40 तक चढ़ गया। 86.67% का जबरदस्त रिटर्न। हालांकि उसके बाद 5.09% उतरा है। अब बुध की बुद्धि…और भीऔर भी

फाइनेंस की दुनिया वास्तविक दुनिया से बहुत अलग होती है। नहीं तो ऐसा कैसे होता कि जिन दिनों देश में कोरोना का कहर था, संक्रमण बढ़ रहा था, उसी दौरान रिलायंस ने जियो प्लेटफॉर्म्स के लिए फेसबुक, सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, के के आर, अबूधाबी इन्वेस्टमेट अथॉरिटी व मुबाडाला जैसे नामी निवेशकों से 97,886 करोड़ रुपए जुटा लिए। राइट्स इश्यू से जुटाए गए 53,124 करोड़ रुपए अलग से हैं। अब मंगल की दृष्टि…और भीऔर भी