यहां धूर्तता या चालाकी नहीं, चले तेज़ दिमाग
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग लाखों लोगों का खेल है। इसलिए इसमें धूर्तता या चालाकियां नहीं चलती। यह दरअसल दिमागदार योद्धाओं का दैनिक संग्राम है। यहां सबसे तेज़ कंप्यूटर, सबसे तेज़ इंटरनेट कनेक्शन या सबसे तेज़ी से रिफ्रेश होनेवाले ब्रोकर टर्मिनल से कमाई नहीं होती। यहां ट्रेडर की कमाई इस बात से होती है कि वह कितनी ज्यादा से ज्यादा काम की सूचनाओं की कितनी तेज़ी से प्रोसेस कर न्यूनतम रिस्क में अधिकतम लाभ के ट्रेड में घुसताऔरऔर भी
न सुनी-सुनाई, न बताई, न ही सोशल मीडिया
कभी सुनी-सुनाई या बताई बातों पर मत जाइए। वॉट्सअप संदेश और सोशल मीडिया पर कतई यकीन न करें क्योंकि वहां निहित स्वार्थी तत्व अफवाहें व झूठी खबरे ही फैलाते हैं। देखिए कि आपका ट्रेडिंग टर्मिनल क्या कह रहा है। ट्रेडिंग टर्मिनल कभी झूठ नहीं बोलता, न बोल सकता है। लम्बे समय का निवेश यकीनन कंपनी की ताकत, प्रतिस्पर्धा की स्थिति और उसके बिजनेस की संभावना जानने की मांग करता है। लेकिन छोटे समय की ट्रेडिंग में मानवऔरऔर भी
कोशिश करें तो बाज़ार खोल देगा तमाम भेद
हमें बाज़ार का हर भेद समझने की कोशिश में लगे रहना चाहिए। बाज़ार बढ़ा है, यह तथ्य तो सबकी आंखों के सामने है। लेकिन वह नई खरीद के दम पर बढ़ा है या पहले बेचे गए शेयरों की खरीद (शॉर्ट कवरिंग) की मजबूरी के चलते, यह हकीकत सभी को पता नहीं होती। वोल्यूम बढ़ने के साथ शेयर के भाव गिर रहे हों तो साफ है कि शॉर्ट कवरिंग चल रही है। कम वोल्यूम में शेयर चढ़ रहाऔरऔर भी
यहां तर्क नहीं, चलती भावनाएं और संभावनाएं
शेयर बाज़ार तर्क पर नहीं, भावनाओं व संभावनाओं पर चलता है। जिसे हम तर्क समझते हैं, उसका असर तो बाज़ार चुटकियों में जज़्ब कर चुका होता है। हम उसे अपनाएं, तब तक वह उस्तादों की उंगलियों से गुजरकर टखने तक पहुंच चुका होता। लंबे समय बाद बनी लम्बी ग्रीन कैंडल देखर हमें लगता है कि अब तो खरीद आएगी और शेयर पक्का बढ़ेगा। लेकिन अगले ही दिन वह धसक जाता है। वैसे, तर्क का तथ्य अगर बाज़ारऔरऔर भी
ज़ोमैटो का लकदक टैटू कहीं टें न बोल जाए!
ज़ोमैटो को पिछले तीन साल से लगातार करोड़ों का घाटा हो रहा है। लेकिन 15 दिन पहले उसका आईपीओ 76 रुपए पर आया तो 38.25 गुना सब्सक्राइब हुआ। लिस्टिंग लगभग 182% ऊपर 138 रुपए पर हुई और अब भी ज्यादा टूटा नहीं है। लेकिन दुनिया के स्तर पर देखें तो फूड डिलीवरी से लेकर जगह किराए पर देने या टैक्सी सेवा देनेवाली कंपनियों ने लिस्टिंग पर भले ही कमाल दिखाया हो, बाद में चमक फीकी पड़ गई।औरऔर भी






