नए साल का आगाज़। उम्मीद थी कि निफ्टी-50 दिसंबर 2021 की तिमाही को 17,500 से ऊपर जाकर विदा करेगा। लेकिन म्यूचुअल फंडों व देशी संस्थाओं की खरीद के बावजूद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की मुनाफावसूली ने ऐसा नहीं होने दिया। दिसंबर तिमाही में निफ्टी मात्र 1.63% बढ़ा है। मौजूदा मार्च 2022 की तिमाही में तो और ज्यादा उलट-पुलट व दबाव रह सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण है अमेरिका समेत यूरोप में बढ़ती मुद्रास्फीति और उस परऔरऔर भी

हर साल, नया साल। नहीं पता कि अगले 365 दिनों में क्या होगा। अज्ञात में छलांग। समय की धार है, प्रवाह है जिसमें हर किसी को बहना है। लेकिन अज्ञान नहीं होना चाहिए। नहीं तो अज्ञात आपको चकरघिन्नी बना सकता है। वहीं, अगर ज्ञान और हौसला हो तो कामयाबी के दरवाजे खुलते चले जाते हैं। शेयर बाज़ार इसी अज्ञात में छलांग लगाने जैसा काम है। जो ज्ञान से, समझदारी से, अपनी सीमाओं को समझते हुए रिस्क उठातेऔरऔर भी

साल का आखिरी ट्रेडिंग सत्र। साथ ही जनवरी 2022 के डेरिवेटिव सौदों के चक्र का पहला दिन। एफआईआई या एफपीआई क्रिसमस की छुट्टियां मनाकर नए साल के लिए नई आवंटित पूंजी के साथ जल्दी ही हमारे बाज़ार में फिर गोता लगाएंगे ताकि मुनाफे का जखीरा यहां से निकाल सकें। यकीनन, अमेरिका से लेकर यूरोप तक में मुद्रास्फीति चरम पर है। अमेरिका में 1982 के बाद और यूरोप में 1997 में साझा हिसाब-किताब रखने के साल से सबसेऔरऔर भी

जो गया वो बीत गया। यकीनन बीतता साल शेयर बाज़ार के ट्रेडरों और निवेशकों के लिए काफी अच्छा रहा है। पांच-सात दिन के ट्रेडर भी इस दौरान दो-तीन महीने के ट्रेड से कमाने लगे। धन के बराबर बने प्रवाह में ट्रेडर मजे से तैरते रहे। बिना किसी साफ रणनीति के इफरात धन वालों ने बाज़ार से जमकर कमाया है और अब मौज कर रहे हैं। बेहद कमज़ोर स्टॉक्स को छोड़ दें तो निवेशकों ने भी अच्छा लाभऔरऔर भी