शेयर बाजार से जीविका है बड़ा यज्ञ प्रश्न!
दो साल से कोरोना ने जितने लोगों को संक्रमित किया, जितने लोगों की जान ली, उससे कई-कई गुना ज्यादा लोग काम-धंधे के ठप हो जाने, नौकरी चले जाने या वेतन घटा दिए जाने से परेशान हैं। मेरा एक परिचित नौजवान पहले एनजीओ में नौकरी करता था। करीब साल भर पहले उसकी नौकरी चली गई तो उसने बेसब्री से पूछा कि क्या मैं शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग से अपना घर-परिवार नहीं चला सकता? इस वक्त देश में ऐसेऔरऔर भी
छोटा हो रहा है सफल निवेश का चक्र!
दुनिया भर के शेयर बाज़ारों के शीर्ष सूचकांकों में हमेशा उस वक्त की अच्छी से अच्छी कंपनियां रखी जाती हैं। कोई कंपनी आज है, हो सकता है कि पांच साल बाद न रहे। साल 1991 में सेंसेक्स में जो कंपनियां थी, 2001 आते-आते उनमें से 18 यानी 60% बदल दी गईं। निफ्टी-50 सूचकांक में तो जैसे 40% कंपनियां एक निश्चित अंतराल के बाद बदल देने का रिवाज़-सा बना हुआ है। इससे एक सबक तो यह है किऔरऔर भी
सरकार निवेशक नहीं, सटोरिया क्यों बना रही!
आम लोग लालच में पड़कर क्रिप्टो ट्रेडिंग की ओर दौड़ सकते हैं। लेकिन हमारी सरकार आम लोगों को क्यों आत्मघाती किस्म का सटोरिया बनाना चाहती है? आखिर क्यों उसने क्रिप्टो से होनेवाली कमाई पर 30% टैक्स लगाकर इसे मान्यता दे दी? गौर करने की बात है कि इसके भाव सिर्फ लालच से उपजी मांग से तय होते हैं। बाकी इसका कोई आधार नहीं। दुनिया भर में कहीं इसका कोई इसका नियंत्रक नहीं। फिर हमारी वित्त मंत्री नेऔरऔर भी
क्रिप्टो में ट्रेड शुद्ध सट्टेबाज़ी, फिर क्यों करना!
शेयर बाज़ार में हर स्टॉक के पीछे कोई न कोई बिजनेस और लिस्टेड कंपनी होती है। कंपनी का धंधा सॉलिड है तो उसका शेयर कभी न कभी बम-बम करेगा। हर डेरिवेटिव के पीछे कोई न कोई स्टॉक या सूचकांक होता है। सोने से लेकर हर मेटल या जिंस के फ्यूचर्स व ऑप्शंस के पीछे भी उसका भौतिक आधार होता है। लेकिन क्रिप्टो के पीछे क्या आधार है? कंप्यूटर प्रोग्रामिंग व आईटी के बहुत ऊंचे उस्ताद क्रिप्टो करेंसीऔरऔर भी







