कहानियों से बने माहौल तो डोले बाज़ार!
शेयर बाज़ार में हर दिन ट्रेडरों के बीच जो गुत्थम-गुत्था चलती है, उसमें जान डालने के लिए माहौल बनाना पड़ता है। ऐसा माहौल जो लोगों की लालच व भय की भावना को भरपूर हवा दे। साल 2020 और 2021 में हर तरफ कहानियां फैलाई गईं कि अर्थव्यवस्था सुधर रही है। कोई कहता कि V के आकार में अर्थव्यवस्था उठ रही है, कोई कहता W के आकार में तो कोई कहता कि K के आकार में। हमारी अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी
लालच व भय की भावनाएं बहें कहां से!
शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग में भाव लालच और भय की भावनाओं से तय होते हैं। लेकिन लालच और भय की इन भावनाओं को कहां से हवा व गति मिलती है? फिर चुनावों का संदर्भ लेते हैं। उत्तर प्रदेश में धारणा बनाई जा रही है कि समाजवादी पार्टी आ गई तो गुड़ों का राज होगा, सभी असुरक्षित, एक ही परिवार का डंका बजेगा। सामने से कहा जा रहा है कि भाजपा झूठ ही झूठ बोलती है, किसान विरोधीऔरऔर भी
मौसम चुनाव का, खेल वोटिंग मशीन का
चुनावों का मौसम है। बढ़-चढ़कर दावे किए जा रहे हैं। पक्ष-विपक्ष दोनों नहीं जीत सकते। लेकिन दोनों का दावा कि सामनेवाले का सूपड़ा साफ हो जाएगा। अवाम की भावनाओं को हवा दी जा रही है। शेयर बाज़ार की ट्रेडिंग भी इसी तरह भावनाओं का खेल है। निवेश के सबसे बड़े गुरु बेंजामिन ग्राहम का मशहूर कथन है कि शेयर बाज़ार छोटे समय में वोटिंग मशीन की तरह काम करता है और लम्बे समय में तराजू का। उनकेऔरऔर भी
न क्रिप्टो, न ट्रेडिंग, केवल लम्बा निवेश!
एक बात हमें अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि न तो अपने यहां देखभाल करनेवाला समाज है और न ही सरकार। हर कोई स्वार्थ का पुतला है। सरकार भी चंद निहित स्वार्थों की सेवा में लगी है। सबका साथ, सबका विकास महज अवाम को झांसा देने का नारा है। सबका विश्वास भी चरका पढ़ाकर हासिल किया जाता है। हमें अपना हित खुद समझना और हासिल करना है। शेयर बाज़ार पर भी यह बात पूरी तरह लागू होतीऔरऔर भी







