आर्थिक महाशक्ति बनने में लगेंगे दशकों
भारत की सबसे बड़ी ताकत विशाल प्राकृतिक व मानव संसाधनों के साथ उसकी उद्यमशीलता है। जीडीपी के आकार में हम भले ही दुनिया में पांचवें नंबर और प्रति व्यक्ति आय में 197 देशों की रैकिंग में 142वें पायदान पर हों, लेकिन स्टार्ट-अप्स की संख्या के मामले में हम समूची दुनिया में अमेरिका व चीन के बाद तीसरे स्थान पर हैं। भारत की यह मूलभूत ताकत उसे कहीं का कहीं पहुंचा सकती है। लेकिन इसका रोडमैप सोचने सेऔरऔर भी
आसार अच्छे नहीं दिखते अर्थव्यवस्था के
पहले विश्व बैंक ने आगाह किया कि अगले कुछ सालो में विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर घटकर 2.2% पर आ सकती है। अब आईएमएफ ने भी आर्थिक सुस्ती की चेतावनी दे दी है। ऐसे में भारत अप्रभावित नहीं रह सकता। एचडीएफसी समूह के मुखिया और देश की मशहूर कॉरपोरेट हस्ती दीपक पारेख मानते हैं कि वैश्विक हालात को देखते हुए भारत की विकास दर आगे धीमी पड़ सकती है। उन्होंने बीते शनिवार को एक समारोह में कहाऔरऔर भी
स्वायत्त रिजर्व बैंक भी दास राजनीति का
विश्व बैंक का कहना है कि भारत की आर्थिक विकास दर चालू वित्त वर्ष 2023-24 में इसलिए कम रहेगी क्योंकि उधार महंगा होने और आमदनी में कम बढ़त से निजी उपभोग में कमी आएगी। लेकिन रिजर्व बैंक कहता है कि हमारा जीडीपी ज्यादा बढ़ेगा क्योंकि रबी की अच्छी फसल से ग्रामीण मांग बढ़ेगी, सरकार के ज्यादा पूंजीगत व्यय से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में क्षमता इस्तेमाल का स्तर उठेगा, बैंक ऋण दहाई अंक में बढ़ रहे हैं और जिंसोंऔरऔर भी
सब कहते घटेगा, रिजर्व बैंक कहे बढ़ेगा
रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली मौद्रिक नीति समीक्षा में बैंकों को दिए जानेवाले अल्पकालिक धन पर ब्याज दर या रेपो रेट को 6.5% पर जस का तस रखा है। लेकिन जीडीपी की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.5% कर दिया है। दो महीने पहले फरवरी में ही उसी ने 6.4% विकास दर का अनुमान लगाया था। आखिर फरवरी और अप्रैल के बीच ऐसा क्या हो गया कि रिजर्व बैंक को लगा कि हमारीऔरऔर भी
कम नहीं होता साल का 10-11% रिटर्न
देश-दुनिया में बुरी खबरें आती ही रहती हैं। लेकिन भारत जैसे विकासशील देश की अर्थव्यवस्था अपनी संपूर्ण संभावना को हासिल करने की दिशा में बढ़ती रहती है। इसलिए यहां का शेयर बाज़ार भी बराबर बढ़ता रहता है। आज आपको जानकर आश्चर्य होगा कि 12 साल पहले अप्रैल 2011 में एनएसई निफ्टी 5550 और बीएसई सेंसेक्स 18,500 अंक के आसपास था। इन 12 सालों में तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों सूचकांक तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुके हैं।औरऔर भी





