देश में कॉरपोरेट क्षेत्र का पूंजी निवेश अभी तक ठंडा पड़ा हुआ है। रिजर्व बैंक के मुताबिक निजी उद्योगों में क्षमता इस्तेमाल का स्तर 73.6% पर अटका हुआ है। कॉरपोरेट क्षेत्र ने सितंबर तक पिछले साल से कम 8.26 लाख करोड़ रुपए के नए निवेश की घोषणा की है। इसमें से भी 4.74 लाख करोड़ रुपए ट्रांसपोर्ट सेक्टर से आए हैं। जाहिर है कि निजी निवेश बहुत सतर्क व चौकन्ना है। केवल सरकारी पूंजी निवेश के बलऔरऔर भी

सरकार का कहना है कि इस बार सितंबर तिमाही में देश का जीडीपी 7.6% बढा है। यह जून तिमाही के 7.8% से कम है। लेकिन तमाम अर्थशास्त्रियों की साझा राय 6.8% और यहां तक कि रिजर्व बैंक के 6.5% के अनुमान से अच्छा-खासा ज्यादा है। हर तरफ बल्ले-बल्ले। लेकिन सतह के नीचे ही नहीं, ऊपर से भी देखें तो तस्वीर में काफी झोल दिखता है। इस बार वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी साल भर पहले से 9.1% बढ़ाऔरऔर भी

लॉटरी की तरह आईपीओ में भी किस्मत का खेल चलता है। जिन लोगों मे हाल ही में इरेडा के आईपीओ में आवेदन डाला होगा, वे इस बात की तस्दीक करेंगे। यह आईपीओ कुल 38.80 गुना और रिटेल यानी दो लाख रुपए तक निवेश करनेवालों की श्रेणी में 7.73 गुना सब्सक्राइब हुआ। ऐसे में करीब आठ में से एक निवेशक को ही शेयर आंवटित होने थे तो इसका फैसला लॉटरी से हुआ। जिनको शेयर मिले, उनका धन कुछऔरऔर भी

निवेशक संरक्षण फंड में 2001-02 से 2021-22 तक के बीस साल में कंपनियां 29,383.39 करोड़ रुपए डाल चुकी हैं। यह धन हर साल बढ़ता रहता है क्योंकि शेयरधारकों द्वारा न लिया लाभांश वगैरह जुड़ता रहता है। सरकार ने इस फंड की देखरेख के लिए सितंबर 2016 से एक विचित्र प्राधिकरण बना दिया। अगस्त 2022 में आरटीआई आवेदन से जवाब मिला कि वित्त वर्ष 2020-21 के अंत तक इस फंड में 18,433 करोड़ रुपए के साथ ही कंपनियोंऔरऔर भी