चुनें वही कंपनी जो हो औसत से बेहतर
देश के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की स्थिति बराबर सुधर रही है। फिर भी वो अभी पूरी क्षमता पर उत्पादन नहीं कर पा रहा। रिजर्व बैंक के अद्यतन सर्वे के मुताबिक बीते वित्त वर्ष 2022-23 में जनवरी-मार्च की चौथी तिमाही में क्षमता इस्तेमाल का स्तर 76.3% रहा है, जबकि इससे पहले की तीन तिमाहियों में यह क्रमशः 74.3%, 74% और 72.4% रहा था। महीने भर पहले छपे रिजर्व बैंक के इस सर्वे में 752 मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों ने भाग लिया।औरऔर भी
सब अपने लिए, नाम लगाकर जनता का!
भारत की अध्यक्षता में हुए जी-20 के आयोजन को जनता का आयोजन बता दिया जाए तो इससे दुनिया या इसके 20 सदस्यों को क्या मिल जाएगा? लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ‘जनता का उत्सव’ और भाजपा ने जनता का जी-20 करार दिया है। क्या देश के 60 शहरों में जी-20 के आयोजन करा देना उसे जनता का उत्सव बना देता है? दिल्ली के प्रमुख आयोजन से दिल्लीवासियों को जिस तरह तीन दिन तक दूर रखा गया,औरऔर भी
आर्थिक मसलों पर सारा कुछ गोलमोल!
जी-20 का मूल मकसद राजनीतिक नहीं, बल्कि विश्व की आर्थिक समस्याओं का समाधान निकालना है। इस बार शिखर सम्मेलन में विश्व अर्थव्यवस्था से संबंधित दो ही प्रमुख मुद्दे उभर कर सामने आए। एक, क्रिप्टो करेंसी का संचालन और दो, स्वास्थ्य संबंधी आकस्मिक चुनौतियों से निपटना। क्रिप्टो करेंसी पर साफ हो गया कि इस पर बैन नहीं लगाया जाएगा, लेकिन इसके नियमन पर कोई सहमति नहीं बनी। वहीं, स्वास्थ्य के संबंध में पेशकश की गई कि इस परऔरऔर भी
जीते हैं हमारे राजनयिक, राजनेता नहीं!
किसी व्यक्ति, कंपनी या संगठन की अहमियत तब मानी जाती है, जब उसके जाने से देश, दुनिया व समाज को बड़ा नुकसान हो और उसके अभाव को भर पाना मुश्किल हो। लेकिन क्या जी-20 के बारे में यही बात कही जा सकती है? जी-20 से अब जी-21 बन गया मंच आज खत्म हो जाए तो इससे दुनिया का कोई नुकसान नहीं होगा। एक फायदा ज़रूर होगा कि इसके आयोजन पर हर साल होनेवाली करोड़ों डॉलर की बर्बादीऔरऔर भी






