निफ्टी ने भले ही थोड़ी कमजोरी दिखाई हो, लेकिन बी ग्रुप के शेयरों में अच्छी-खासी खरीद हुई है। यह मेरी अपेक्षा के अनुरूप है। निफ्टी जब तक खुद को 5600 से 5700 के बीच जमाता है, तब तक बी ग्रुप के शेयरों का मूल्यांकन सुधरने लगा है। निफ्टी 5659.85 तक जाने के बाद 5632.10 पर बंद हुआ है जो मुझे लगता है कि अच्छा स्तर है। इसके आगे यह कभी भी धमाके के साथ 5715 तक पहुंचऔरऔर भी

बीएसई सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में पांच ऐसे हैं जिन्होंने चालू साल 2011 की पहली छमाही में बाजार को मात दी है। 3 जनवरी 2011 को बाजार में कारोबार के पहले दिन और छमाही के आखिरी दिन 30 जून 2011 को सेंसेक्स और इन शेयरों के बंद भाव के अंतर को देखकर साफ हो जाता है कि कैसे इन्होंने बाजार की दिशा से अलग हटकर बढ़त हासिल की है। सेंसेक्स के ये पांच पांडव है –औरऔर भी

आंध्रा शुगर्स सिर्फ चीनी नहीं बनाती। वह इसके अलावा एल्कोहल व उससे संबंधित रसायन, एस्पिरिन, क्लोरो एल्कली – सल्फ्यूरिक एसिड, सुपर फॉस्फेट व कॉस्टिक सोडा और बिजली तक बनाती है। इन सभी रसायनों से उसे फायदा हो रहा है, जबकि चीनी उसके गले का कंटक बन गई है। वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजों के अनुसार चीनी से हुई उसका बिक्री साल भर पहले के 211.42 करोड़ रुपए से 51.75 फीसदी घटकर 102.01 करोड़ रुपए रह गई औरऔरऔर भी

हम लाख जतन कर लें, भरपूर तैयारी कर लें, फिर भी अनिश्चितता व अनहोनी की गुंजाइश बनी रहती है। यह कमजोरी नहीं, हमारी सीमा है। इसलिए अनहोनी से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।और भीऔर भी

केंद्र सरकार अपने आर्थिक खुफिया तंत्र को और भी चौकस बनाने में जुट गई है। इस सिलसिले में सेंट्रल इकनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (सीईआईबी) की भूमिका, कामकाज व सांगठनिक ढांचे की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को सौंप दी। इस समिति का गठन मार्च 2011 में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व सदस्य एस एस खान की अध्यक्षता में किया गया था। समिति ने करीब तीन महीनेऔरऔर भी

देश में आ रहे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की दिशा बदलने लगी है। बीते वित्त वर्ष 2010-11 में देश में आया एफडीआई साल भर पहले से 25 फीसदी घट गया था। लेकिन चालू वित्त वर्ष 2011-12 के पहले दो महीनों में इसमें 77.25 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। सोमवार को सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-मई 2011 में देश में आया एफडीआई 778.5 करोड़ डॉलर का रहा है, जबकि पिछले साल केऔरऔर भी

डायबिटीज के मरीजों की संख्या में तीव्र वृद्धि के बीच दुनिया भर की कंपनियां इसके इलाज और इसकी रोकथाम के लिए नई दवाओं के विकास पर जोर दे रही हैं। दो साल के भीतर नई विकसित की जा रही दवाओं की संख्या करीब ढाई गुना हो गई है। अमेरिका की अग्रणी दवा अनुसंधान और जैव प्रौद्योगिकी कंपनियों के संघ, फार्मास्यूटिकल रिसर्च एंड मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन (पीएचआरएमए) के मुताबिक 2010 में उसकी सदस्य कंपनियों द्वारा डायबिटीज या मधुमेह कीऔरऔर भी

पिछले दो साल में भवन निर्माण की लागत 18 फीसदी बढ़ गई है। यह कहना है रीयल एस्टेट क्षेत्र पर नजर रखने वाली ऑनलाइन डाटा व विश्लेषण फर्म प्रॉपइक्विटी का। इससे रीयल एस्टेट के कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रोपइक्विटी के एक अध्ययन मुताबिक 2009 से 2011 के बीच सीमेंट, स्टील, मजदूरी और ईंट जैसी चार प्रमुख चीजों के महंगा होने से निर्माण लागत में कुल 18 फीसदी वृद्धि हो गई है। इस तरह लागत बढ़ जानेऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट का भरोसा इस बात से उठ गया है कि केंद्र सरकार विदेश बैंकों में जमा भारतीयों के काले धन का पता लगाकर उसे वापस लाएगी। इसलिए उसने खुद इस काम के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला किया है। इस दल की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज न्यायमूर्ति बी पी जीवन रेड्डी करेंगे और सुप्रीम कोर्ट के ही पूर्व जज न्यायमूर्ति एम बी शाह इस दल में उपाध्यक्ष के बतौरऔरऔर भी

कुछ कंपनियों का दायरा इतना बड़ा होता है कि स्टैंड-अलोन नतीजे उनकी पूरी स्थिति बयां नहीं करते। टाटा मोटर्स ऐसी ही एक कंपनी जिसका दायरा वाहनों के हर सेगमेंट से लेकर देश-विदेश तक फैला हुआ है। ट्रक, सेना के विशाल ट्रक, मिनी ट्रक, बस और बड़ी कार से लेकर नैनो तक। टाटा सफारी से लेकर जैगुआर और लैंड रोवर तक। इसका शेयर 6 दिसंबर 2010 को 1381.40 रुपए का शिकर पकड़ने के बाद नीचे का रुख किएऔरऔर भी