मैं नहीं जानता कि एफआईआई के तौर-तरीकों, उनके बर्ताव और बाजार की गति पर मैं हँसूं कि रोऊं? पिछले सेटलमेंट तक शोर था कि निफ्टी 5000 का स्तर तोड़कर नीचे चला जाएगा। बेचारे ट्रेडरों ने 5000 के पुट ऑप्शन खरीद डाले। ऐसा इसलिए भी हुआ क्योंकि एक प्रमुख विदेशी ब्रोकिंग हाउस ने अखबारों के जरिए सार्वजनिक तौर पर राय रखी थी कि पहले तीन महीने बाजार गिरेगा और उसके बाद 20 फीसदी बढ़ेगा। इस तरह के बयानऔरऔर भी

भारतीय बाजार ने दिखा दिया है कि यहां एक तरफ बहुत-सी कंपनियां मुश्किल में हैं और अपना धंधा बेचने को तैयार हैं, वहीं दूसरी तरफ बहुत-सी कंपनियां इस कदर संभावनाओं से भरी हैं कि उन्हें खरीदनेवालों की लाइन लगी है। ऑफिस स्टेशनरी बनानेवाली कैमलिन अपनी 50.3 फीसदी इक्विटी जापानी कंपनी कोकुयो को 365 करोड़ रुपए में बेचने में कामयाब हो गई। इससे पहले कनोरिया केमिकल्स अपना एक डिवीजन आदित्य बिड़ला समूह को बेच चुकी है। अब सबेरोऔरऔर भी

बाजार में निराशावादी अब भी मंदड़ियों की पताका लहरा रहे हैं। हर बढ़त का इस्तेमाल नए शॉर्ट सौदों के लिए किया जा रहा है। मुझे पक्का नहीं है कि एफआईआई आगे क्या करने जा रहे हैं क्योंकि वे विशुद्ध ट्रेडर बन चुके हैं और ऑप्शन प्रणाली के जरिए ट्रेडिंग के लिए अल्गोरिथम का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि उन्हें आखिरकार इसमें नुकसान ही उठाना पड़ेगा क्योंकि भारतीय बाजार में वो गहराई व विस्तार नहीं है जहां अल्गोरिथमऔरऔर भी

निफ्टी में 5330 या सेंसेक्स में 17,770 को हमने बाजार का बॉटम बताया था। सेंसेक्स दो दिन पहले 25 मई को 17,786 तक गिरने के बाद 17,847 पर बंद हुआ था। आज, शुक्रवार को सेंसेक्स पलटकर उस स्तर से 419 अंक ऊपर जाकर 18,266 पर पहुंच गया। अब हम दावे के साथ कह सकते हैं कि बाजार अपनी तलहटी पकड़ने के बाद ऊपर उठ रहा है। अब 4800 या 5000 की अफवाहों को हमें इस सेटलमेंट केऔरऔर भी

पूरा शेयर बाजार और यहां का तकरीबन हर कारोबारी इसी राय का है कि अब तो निफ्टी को 4800 तक जाना ही है। इसलिए हर कोई जहां भी संभव है, शॉर्ट सौदे ही कर रहा है। यहां तक कि विशेषज्ञ भी शॉर्ट करने के मौके तलाश रहे हैं। ब्लैकबेरी पर संदेश घुमाए जा रहे हैं कि फलां कंपनी बुरी है, उसे निकाल दो। दूसरा एसएमएस कहता है कि निफ्टी सबसे बुरे दौर की तरफ बढ़ रहा है।औरऔर भी

आखिरकार नॉर्थ ब्लॉक में राजनीतिक गतिरोध टूटता हुआ दिख रहा है। आठ सालों बाद वित्त मंत्रालय विनिवेश का पल्लू छोड़कर पूरी तरह निजीकरण की तरफ निर्णायक कदम बढ़ा रहा है। स्कूटर्स इंडिया को बेचने का फैसला हो चुका है। राज्यों के चुनाव नतीजों ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले की जांच व कार्रवाई को लेकर सारी उहापोह खत्म कर दी है। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) इसकी जांच कर ही रही है। डीएमके को अवाम ने सत्ता से बाहरऔरऔर भी

बाजार में रोलओवर की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। आज बहुत ज्यादा नहीं, लेकिन ठीक-ठाक उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। सेंसेक्स 140.63 अंक इधर-उधर होने के बाद 55.20 अंकों (0.31%) की बढ़त लेकर बंद हुआ तो निफ्टी 41.35 अंक इधर-उधर होने के बाद 7.50 अंक (0.14%) बढ़कर बंद हुआ है। रोलओवर का दौर कल से शुरू हो जाएगा और अगले हफ्ते गुरुवार तक पांच दिन चलेगा। वैसे आपको बता दूं कि रोलओवर का खेल शुद्ध रूप से एफआईआई केऔरऔर भी

एमएससीआई (मॉरगन स्टैनले कैपिटल इंटरनेशनल) सूचकांक को बदला जा रहा है। इसमें उभरते बाजारों का वजन बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय बाजार में एफआईआई की खरीद 13 करोड़ डॉलर बढ़ सकती है। लेकिन बाजार के लिए 13 करोड़ डॉलर कोई मायने नहीं रखता। साथ ही इस एमएससीआई के भारत सूचकांक में छह नई कंपनियों – टाइटन इंडस्ट्रीज, डाबर इंडिया, श्रीराम ट्रांसपोर्ट, मुंद्रा पोर्ट, बैंक ऑफ इंडिया और एशियन पेंट्स को शामिल किया गया है। बाजार में आम गिरावटऔरऔर भी

बाजार में विश्वास का स्तर एकदम डूबने की कगार पर पहुंच चुका है। इस बीच कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी ने डीएमके के पराभव के बाद पहली बार जयललिता की तरफ हाथ बढ़ाया है। लगता है कि जैसे मैडम इसी दिन का इंतजार कर रही थीं। अगर गठबंधन सत्ताधारी पार्टी की मजबूरी है तो विधानसभा चुनावों के नतीजों ने रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार व घोटाले के इस माहौल में यकीकन उसकी मजबूरी को थोड़ा हल्का किया है। मुझे नहीं लगताऔरऔर भी

चुनाव गरज-बरस कर चले गए। कंपनियों के नतीजों का मौसम भी बीत चला। अब सारे बाजार की निगाहें मानसून की घटाओं पर लग गई हैं। मौसम विभाग की मानें तो दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 31 मई को केरल के तट पर समय से एक दिन पहले दस्तक दे देगा। अभी तक का अनुमान यही है कि मानसून अच्छा रहेगा। मानसून के अच्छे रहने से कृषि उत्पादन अच्छा रहेगा। इससे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के विकास को मदद मिलेगी। लेकिनऔरऔर भी