रिजर्व बैंक ब्याज दरों को बराबर बढ़ा रहा है, फिर भी मुद्रास्फीति पर लगाम नहीं लग रही। हां, इससे आर्थिक विकास की रफ्तार पर जरूर लगाम लगती दिख रही है। बाजार को यह कतई पसंद नहीं और वो किसी न किसी बहाने लार्सन एंड टुब्रो, इनफोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), एसबीआई व मारुति सुजुकी जैसी ऊंची विकास दर वाली कंपनियों को भी लपेटे जा रहा है। रिलायंस का स्टॉक दो साल के न्यूनतम स्तर पर आ चुका है।औरऔर भी

मुद्रास्फीति बढ़कर 9.06 फीसदी हो गई। चीन तक ने ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा दी हैं। अब तो बाजार के लोगों को सचमुच यकीन हो चला है कि रिजर्व बैंक 16 जून को ब्याज दरें 0.50 फीसदी बढ़ा देगा। इतनी बुरी खबरों के बावजूद निफ्टी 5520 तक जाने के बाद 5500 के ऊपर बंद हुआ है। यह क्या दर्शाता है? हमने पहले भी कहा था और हमें अब भी लगता है कि यही बाजार के सही मूल्यांकनऔरऔर भी

बाजार का विश्वास पहले से ही डिगा हुआ था। ऊपर से निफ्टी 5480 के प्रतिरोध स्तर से भी नीचे चला गया। यह इस बात का साफ संकेत है कि निफ्टी में आगे भी कमजोरी बनी रहेगी। हालांकि बाजार में भागीदारी की जो स्थिति है, उसे देखते हुए इसके बढ़ने की भी इतनी ही ज्यादा गुंजाइश है। आज भी दोपहर बारह बजे के बाद यह कोशिश नजर आई। लेकिन छोटी-सी रेंज में थोड़े से वोल्यूम के साथ बाजारऔरऔर भी

बाजार बहुत मजबूत धरातल पर खड़ा है क्योंकि मुद्रास्फीति में कमी के आसार बढ़ गए हैं। साथ ही यह भी स्थिति बन रही है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक देगा। पहली तिमाही के खराब नतीजों के असर को बाजार मौजूदा भावों में सोख चुका है। इसलिए निफ्टी के 4700 तक गिर जाने की अतिवादी आशंका पूरी होने की उम्मीद नहीं है। ऐसा उसी हालत में हो सकता है, जब अण्णा, बाबा,औरऔर भी

मैंने सुना और अखबारों में पढ़ा भी कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दोनों ही छोटी व मध्यम आकार की कंपनियों के लिए जल्दी ही अलग एसएमई एक्सचेंज शुरू करने जा रहे हैं। इस एक्सचेंज को लेकर बहुत सारे ट्रेडर और निवेशक काफी उत्साहित हैं। छोटी कंपनियों के आईपीओ में अमूमन कॉरपोरेट गवर्नेंस का स्तर अच्छा नहीं होता। ऐसे ज्यादातर आईपीओ खुलने से पहले ही बिक जाते हैं। आईपीओ की लिस्टिंग पर भावऔरऔर भी

मानसून की सही व अच्छी शुरूआत, लेकिन आर्थिक विकास दर में कमी, कंपनियों के लाभार्जन का सिकुड़ना और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को बैंकों के ऋण-प्रवाह में कमी। यह सब ऐसी बातें हैं जिनके सम्मिलित प्रभाव से हो सकता है कि रिजर्व बैंक अब ब्याज दरों को बढ़ाने का सिलसिला रोक दे। हालांकि चीन सीआरआर (केंद्रीय बैंक के पास बैंकों द्वारा अनिवार्य रूप से रखा जानेवाला कैश) में एक और वृद्धि करनेवाला है। लेकिन भारत में ब्याज दर कीऔरऔर भी

बाजार उठने की पुरजोर कोशिश करता रहा। दो बजे तक मंदड़िए हावी रहे। लेकिन उसके बाद तेजड़िए इसे आगे ले जाने में कामयाब रहे। उन्होंने लांग पोजिशन बना रखी है जबकि दूसरे कारोबारी शॉर्ट हुए पड़े हैं। इसलिए यह बड़ी बात है कि बाजार अंत में बढ़त लेकर बंद हुआ है। निफ्टी में 0.28 फीसदी तो सेंसेक्स में 0.24 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पूरे हफ्ते की दशा-दिशा तय हो सकती है। आज की बढ़तऔरऔर भी

अनिश्चितताओं का क्रम जारी है। बहुत से अनुत्तरित सवाल बाजार को डोलायमान किए हुए हैं। पिछले सेटलमेंट में सेंसेक्स 17,770 तक गिरने के बाद सुधरकर 18,600 पर आया ही था कि कुछ नई बुरी खबरों ने पटरा कर दिया। यकीनन, कच्चा तेल, मुद्रास्फीति और ब्याज दरों का बढ़ना जैसे पुराने मुद्दे बरकरार हैं। लेकिन इधर ग्रीस में फिर से उभरे ऋण संकट और अमेरिका में आई सुस्ती ने बाजार की मानसिकता को चोट पहुंचाई है। यहां तकऔरऔर भी

बाजार पलटकर उठा। सुबह-सुबह सेंसेक्स 18,672.65 और निफ्टी 5604.95 तक चला गया। निफ्टी का यूं 5600 के स्तर को पार करना बड़ी बात थी। लेकिन दोपहर बारह बजे के बाद बाजार अपनी बढ़त को बनाए नहीं रख। माना जा रहा था कि निफ्टी के 5580 के ऊपर पहुंचते ही टेक्निकल एनालिस्ट और बाजार के पंटर भाई लोग लांग होने या खरीद की भंगिमा अपनाने जा रहे हैं। लेकिन शर्त यही है कि निफ्टी को इससे ऊपर बंदऔरऔर भी

खराब आर्थिक आंकड़ों के चलते अमेरिकी बाजार कल गिर गया और ग्रीस को डाउनग्रेड कर दिया गया। इन दोनों ही घटनाओं का दुनिया के बाजारों पर पड़ा तो भारतीय बाजार भी आज सुबह गिरकर खुले। दिन भर ऊंच-नीच का क्रम चला और आखिकार सेंसेक्स 114.63 अंकों की गिरावट के साथ 18,494.18 और निफ्टी 41.65 अंकों की गिरावट के साथ 5550.35 पर बंद हुआ। लेकिन अगर दुनिया के बाजार न भी गिरे होते तो भारतीय बाजार गिर सकताऔरऔर भी