अखिलेश केंद्र में तो मंदड़िए सकते में

सबसे पहले तो आप सभी को रंगों के त्योहार होली की शुभकामनाएं। यह होली आपकी सारी दुख-तकलीफ का अंत कर दे और जीवन में खुशियों के नए रंग भर दे। हमारा वादा है कि नए वित्त वर्ष 2012-13 में यह लक्ष्य हासिल करने के लिए हम और भी कठिन-कठोर प्रयास करेंगे।

कल मैंने कहा था कि 5277 के नीचे जाना बाजार के रुख को पलट देगा और वाकई अब निफ्टी के 4900 तक जाने का दरवाजा पूरा खुल चुका है। फिर भी बाजार अगर 5300 के ऊपर बंद होता तो फिर से उभरती रैली की संभावना बन सकती थी क्योंकि बाजार पहले से ओवरसोल्ड अवस्था में पहुंच चुका है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्पॉट बाजार में निफ्टी मामूली गिरावट के साथ 5220.45 पर बंद हुआ है, जबकि मार्च के निफ्टी फ्यूचर्स का आखिरी भाव 5257 रहा है।

उस्ताद लोग जब तक बाजार को दबाकर रखना चाहते हैं, तब तक वो दबा रहेगा। लेकिन उसके बाद वो विधानसभा चुनावों को भूल जाएगा और वैश्विक घटनाक्रमों के हिसाब से चलने लगेगा। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार से बहुत-सी अच्छी चौंकानेवाली चीजें सामने आ सकती हैं।

हम भारतीय उम्मीद पर कायम हैं। और, एक और उम्मीद अभी ज़िंदा है। वो यह कि अखिलेश यादव ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वे राष्ट्रीय राजनीति में उतर सकते हैं। इसकी घोषणा मंदड़ियों पर एकबारगी भारी पड़ सकती है। निफ्टी 5600 तक पहुंच सकता है। कांग्रेस भी केंद्र सरकार में लालू के आरजेडी, अजित सिंह के आरएलडी और ममता बनर्जी की टीएमसी जैसी छोटी पार्टियों के के बजाय अखिलेश को तरजीह दे सकती है। हो सकता है कि अखिलेश को कोई अहम मंत्रालय दे दिया जाए। आखिर, हाथी को हरानेवाले का साथ उसके हाथ को मजबूत बना सकता है। ऐसा 2014 के आम चुनावों के मद्देनजर किया जाएगा।

दूसरे, बिहार और गुजरात की तर्ज पर अब काम करने का अंदाज होगा कि उपलब्धि दिखाओ, नहीं तो किनारे हटो। इसलिए कांग्रेस हाईकमान अब पूरी समझदारी से अपनी सर्वोत्तम पहल करने की कोशिश करेगा। तीसरे, सब कुछ गंवा चुकने के बाद जो भी होगा, बेहतर ही होगा। इसलिए यूपीए सरकार कुछ ऐसा करेगी जिससे वह थोड़ी तारीफ पा सके। उसी तरह जैसे भारतीय टीम ने 36वें ओवर में मैच जीतने का ऐतिहासिक प्रयास किया।

आखिरी, लेकिन अहम बात। बाजार के पास एक और आखिरी समर्थन का स्तर 200 दिनों के मूविंग औसत (डीएमए), 5165.25 पर है। लेकिन वो भी टूट गया तो निफ्टी का 4900 तक गिर जाना लाजिमी है। ऐसा न तो चुनाव नतीजों की वजह से होगा और न ही वैश्विक घटनाक्रमों के चलते। ऐसा होगा बाजार में ली गई पोजिशन और डेरिवेटिव सौदों में कैश सेटलमेंट की व्यवस्था से, जो बाजार चलानेवालों को जबरदस्त मनचाहा उतार-चढ़ाव पैदा करने की खुली छूट देती है। 4500 से 5700 की पिछली रैली कहीं से भी आश्वस्त करनेवाली नहीं थी और हमने आपको आगाह भी किया था।

फिर भी, 5200 पर निफ्टी और 17,000 पर सेंसेक्स एफआईआई का धन खींचने के लिए बाजार में मूल्यांकन का अच्छा स्तर है। वे कब और कैसे अपना धन यहां लाएंगे, यह उनकी इच्छा और उनके गेमप्लान पर निर्भर करता है। फिलहाल तो वे महज शॉर्ट सेल करके बाजार को नीचे ला सकते हैं और कैश का अंतर डकार सकते हैं। अगर उन्होंने सरकार (ओएनजीसी का इश्यू) तक को नहीं बख्शा तो बहुत ही कम गुंजाइश है कि भारतीय ट्रेडरों और निवेशकों को छोड़ेंगे। बजट तक ट्रेडिंग करने से बचें क्योंकि इस दौरान बाजार में भयंकर ऊंच-नीच के आसार हैं।

जो लोग साफ-साफ दिख रही गड़बड़ियों को भी पचा जाते हैं, वे सभ्य समाज के विकास की राह का बहुत बड़ा रोड़ा हैं।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

1 Comment

  1. वो यह कि अखिलेश यादव ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वे राष्ट्रीय राजनीति में उतर सकते हैं। इसकी घोषणा मंदड़ियों पर एकबारगी भारी पड़ सकती है। निफ्टी 5600 तक पहुंच सकता है।

    ye to bahee jai si bate karta hai

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