बताकर नहीं बीतेगा सबसे बुरा वक्त

बाजार आज खुला ही निफ्टी में 5110 के हमारे लक्ष्य के काफी करीब। लेकिन पूरे दिन वह खुद को जमाने में लगा रहा। अंत में बंद हुआ 1.03 फीसदी की गिरावट के साथ 5031.95 पर। असल में बाजार को इंतजार है कि कल अमेरिका का केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व अपनी नीति निर्माता समिति की बैठक के बाद अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए किन उपायों की घोषणा करता है। वैसे बाजार के 70 फीसदी लोग मानते हैं कि ऑपरेशन ट्विस्ट की शुरूआत हो सकती है जिसके तहत फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को नीचे लाने के लिए लंबी अवधि के ट्रेजरी बांड वापस खरीदेगा।

इसका मतलब हुआ कि बुधवार को बाजार काफी बड़े अंतर के साथ खुलंगे। उम्मीद पूरी तो तेजी के साथ। उम्मीद अधूरी तो गिरावट के साथ। यूरोप की बात करें तो ग्रीस का मामला अब हाथ से निकल चुका है। इसलिए हम उसके बारे में जितना जल्दी चर्चा बंद कर दें, हमारे लिए उतना ही अच्छा होगा।

वैसे दुनिया में हर जगह शेयर बाजार भारतीय फिल्म जब वी मेट के उस सीन की हालत में पहुंच चुके हैं जब हीरो कहता है – जितना बुरा होना था, हो चुका है। अब और बुरा क्या होगा? यहां से तो अब केवल अच्छा और बेहतर ही हो सकता है…

हमें यह बात बहुत साफ-साफ समझ लेनी चाहिए। क्या आपको लगता है कि जब आपको ‘संकट खत्म’ होने का संकेत दे दिया जाएगा, तब आप कोई भी स्टॉक सस्ते में खरीदने की स्थिति में रहेंगे?  जोखिम उठाना मुनाफा कमाने की पूर्व शर्त है। जो जोखिम नहीं उठाते, उन्हें प्रीमियम यानी ज्यादा कीमत देनी पड़ती है। याद रखें, सबसे बुरा वक्त बीत चुका है। अब केवल इसका समाधान देनेवाला आसान गणित ही सामने आना बाकी है।

अन्वेषक एक सीधा-साधा सामान्य इंसान होता है जो अपनी पढ़ाई को बहुत गंभीरता से नहीं लेता।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का पेड-कॉलम है, जिसे हम यहां मुफ्त में पेश कर रहे हैं)

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