आईएमएफ ने आगाह किया है कि अगर सुपर अल-नीनो आगे गहराता है तो भारत पर तीन तरह से नकारात्मक असर पड़ सकता है। पहला, मौसम के अतिरेक से कृषि उत्पादकता और फसलों की पैदावार घट सकती है। दूसरा, कृषि से आनेवाली सप्लाई घटने से ज़रूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। तीसरा, खाद्य वस्तुओं की महंगाई आम परिवारों के लिए अघोषित टैक्स का काम करेगी और उपभोग की अन्य चीजों पर उन्हें अपना खर्च घटाना पड़ सकता है। कृषि पर इसका परोक्ष प्रभाव अभी से दिखने लगा है। देश में इस साल अप्रैल से सितंबर तक यानी खरीफ सीजन में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व सल्फर युक्त उर्वरकों की बिक्री साल भर पहले की समान अवधि से 22.2% और पोटाश युक्त उर्वरकों की बिक्री 11.7% कम रही है। सितंबर महीने में ट्रैक्टरों की बिक्री 18.1% घट गई है। वैसे ग्रामीण इलाकों में कहा जा रहा है कि नवंबर से मार्च तक रबी सीजन में फसलों के लिए खास बारिश की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन उन्हें अंदाज़ा नहीं है कि अल-नीनो के चलते सामान्य से अधिक तापमान रहने पर गेहूं से लेकर मटर व अन्य दालों और तिलहन को क्या नुकसान पहुंच सकता है। ठंड में गरमी से श्रमिकों की उत्पादकता और काम के घंटों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। दरअसल, जानकारों का कहना है कि अल-नीनो से महज जलवायु नहीं, बल्कि पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार को झटका लग सकता है। अब मंगलवार की दृष्टि…
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