अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने ताज़ा वर्ल्ड इकनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में सख्त चेतावनी दी है कि जल्दी ही वैश्विक अर्थव्यवस्था की सहन-शक्ति की परीक्षा हो सकती है। अब तक गंभीर भू-राजनीतिक संकट के बीच भी अनेक सुरक्षा कवच अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होने से बचाते रहे। लेकिन अब इनकी भी सामर्थ्य छीझ गई है। इसी के साथ आईएमएफ का अनुमान है कि इस साल 2026 में विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर पिछले साल 2025 के 3.5% से घटकर 3.1% पर आ सकती है। लेकिन इसी के साथ उसने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भारत के जीडीपी की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया है, जबकि जुलाई में उसने 6.4% की विकास दर का अनुमान पेश किया था। उसका कहना है कि ऐसा भारत में सुदृढ़ घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की प्रबल सक्रियता के दम पर बने उम्मीद से कहीं ज्यादा मजबूत आवेग के आधार पर किया गया है। इससे पहले रिजर्व बैंक भी इस साल की विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर चुका है। लेकिन ये सारा अनुमान दरअसल आशा नहीं, बल्कि झांकी बनाने के करतब पर टिका है। आईएमएफ की मजबूरी यह है कि डूबती विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भारत तिनके का सहारा है। रिजर्व बैंक की मजबूरी यह है कि वो अब कोई स्वायत्त संस्था नहीं रहा, बल्कि भारत सरकार का शाखामृग बन चुका है। अब बुधवार की बुद्धि…
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