भारतीय रिजर्व बैंक पहले भी कमाता था और अब भी कमाता है। वो अपना सारा खर्च खुद उठाता है। लेकिन मई 2014 में सत्ता में आते ही मोदी सरकार की वक्री दृष्टि उसके खजाने पर पड़ गई। तभी से वो रिजर्व बैंक का 99.99% लाभ सफाचट करती रही है। लेकिन उसकी धूर्तता को बड़ी चालाकी से ढंक लिया है। पहले रिजर्व बैंक अपनी सालाना रिपोर्ट में सकल आय के साथ आंतरिक रिजर्व में डाला गया कंटेन्जेंसी फंड (सीएफ) और ऐसेट डेवलपमेंट फंड (एडीएफ) अलग से दिखाता था। मोदी सरकार ने सत्ता संभालते ही 2013-14 से ये दोनों फंड शून्य कर दिए। तब से रिजर्व बैंक की सकल आय ही उसकी शुद्ध आय बन गई जिसका 99.99% हिस्सा सरकार हथियाने लगी। फिर अगस्त 2019 में जालान समिति की रिपोर्ट आने के बाद रिजर्व बैंक ने टेबल में सीएफ और एडीएफ का अलग ब्योरा देना ही बंद कर दिया। बस फुटनोट में लिखा जाने लगा कि 30 जून 2015 से सीएफ और एडीएफ में ट्रांसफर की गई रकम आय विवरण के प्रावधान मद में दिखाई जा रही है। पहले की सकल आय अब रिजर्व बैंक की शुद्ध आय बन गई और इसमें से कुल खर्च + 4 करोड़ रुपए घटाने के बाद बची सारी रकम केंद्र सरकार को दी जाने लगी। इस तरह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में की जा रही रिजर्व बैंक की लूट पर वैधानिकता और गोपनीयता का परदा डाल दिया। अब मंगलवार की दृष्टि…
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